
800 करोड़ हुए इंसान, अगले साल चीन को पछाड़ देगा भारत, 2050 तक इन 8 देशों में रहेगी आधी आबादी
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दुनिया की आबादी 800 करोड़ हो गई है. संयुक्त राष्ट्र ने जुलाई में अपनी रिपोर्ट में 15 नवंबर तक दुनिया की आबादी 800 करोड़ होने का अनुमान लगाया था. धरती पर इंसानों की आबादी 700 से 800 करोड़ होने में महज 11 साल का समय लगा है. जबकि, 600 से 700 करोड़ होने में 12 साल का समय लगा था.
हम लोग यानी इंसान, आज दुनियाभर में हमारी संख्या 800 करोड़ हो गई है. संयुक्त राष्ट्र ने अपनी रिपोर्ट में अनुमान लगाया था कि 15 नवंबर तक दुनिया की आबादी 800 करोड़ यानी 8 अरब हो जाएगी. इंसानों की आबादी को 700 से 800 करोड़ तक पहुंचने में महज 11 साल का वक्त लगा है. 2011 में हमारी आबादी 700 करोड़ पहुंच गई थी.
संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, 1950 के बाद दुनिया की आबादी बढ़ने की दर लगातार कम होती रही है. 2020 में ये दर कम होकर 1% से भी नीचे आ गई थी. हालांकि, इसके बावजूद आबादी बढ़ रही है.
ऐसा अनुमान है कि 2030 तक आबादी बढ़कर 850 करोड़ के करीब पहुंच जाएगी. जबकि, 2050 तक आबादी 970 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है. 2080 के दशक में धरती पर इंसानों की आबादी एक हजार करोड़ से भी ज्यादा हो जाएगी.
आबादी बढ़ने के कारण क्या हैं?
1. औसत आयु बढ़नाः 1950 के दशक में इंसान औसतन 45 साल जीता था, जबकि आज 71 साल से ज्यादा जीता है. 1990 की तुलना में 2019 में इंसान की औसत आयु 9 साल से ज्यादा बढ़ गई है. 1990 में औसत आयु 64 साल थी, जो 2021 में बढ़कर 72.8 साल हो गई. हालांकि, कोरोनावायरस के कारण 2021 में ये औसत आयु घटकर 71 साल पर आ गई. 2050 तक ये और बढ़कर 77.2 साल तक पहुंचने का अनुमान है.
2. जनसंख्या विस्फोटः 1950 में एक महिला औसतन 5 बच्चों को जन्म देती थी. आज दुनिया में हर महिला औसतन 2.5 बच्चों को जन्म दे रही है. जन्म दर में कमी आने के बावजूद जनसंख्या विस्फोट से आबादी बढ़ी. 1980 के दशक तक हर साल औसतन सालाना 14 करोड़ बच्चों का जन्म हुआ. 2021 में ही 13.4 करोड़ बच्चे पैदा हुए. 2040 से 2045 के बीच में हर साल औसतन 13.8 करोड़ बच्चों के जन्म होने का अनुमान है.

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