
80 की मौत, 125 की गिरफ्तारी, 150 का सरेंडर... 4 महीने में ऐसे तबाह हुए नक्सली, टूट गई कमर
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छत्तीसगढ़ में इस साल अब तक 80 नक्सली मारे गए हैं. 125 से अधिक गिरफ्तार किए गए हैं, जबकि 150 ने सरेंडर किया है. दो दिन पहले ही सुरक्षा बलों के साथ भीषण मुठभेड़ में 29 नक्सली मारे गए थे.
छत्तीसगढ़ में इस साल अब तक 80 नक्सली मारे गए हैं. 125 से अधिक गिरफ्तार किए गए हैं, जबकि 150 ने सरेंडर किया है. दो दिन पहले ही सुरक्षा बलों के साथ भीषण मुठभेड़ में 29 नक्सली मारे गए थे. केंद्रीय गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार 2004-14 की तुलना में 2014-23 में देश में वामपंथी उग्रवाद से संबंधित हिंसा में 52 फीसदी की गिरावट आई है. इसके साथ ही मरने वालों की संख्या 6035 से 1868 यानी 69 फीसदी हो गई है.
छत्तीसगढ़ में नई सरकार के गठन के साथ ही नक्सलियों के खिलाफ सक्रिय अभियान चलाए गए हैं. पिछले साल नक्सल प्रभावित राज्यों में सुरक्षा स्थिति की समीक्षा के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने माओवादियों के खिलाफ सक्रिय अभियान चलाने का निर्देश दिया था. एक विशेष समिति का गठन भी किया गया था. इसमें पुलिस महानिदेशक, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, बीएसफ, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस और खुफिया ब्यूरो के महानिदेशक आदि शामिल किए गए थे.
मंगलवार को छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में सुरक्षाकर्मियों ने राज्य में अब तक की सबसे बड़ी मुठभेड़ में 29 नक्सलियों को मार गिराया. इसमें शंकर राव जैसा कुख्यात नक्सल कमांडर भी शामिल था. नक्सलियों के साथ मुठभेड़ के इतिहास में उनके मारे जाने की ये सबसे बड़ी घटना मानी जा रही है. इस मुठभेड़ में तीन सुरक्षाकर्मी भी घायल हो गए थे. सुरक्षा बलों ने यहां से एके-47, इंसास रायफल और एलएमजी के साथ बड़ी मात्रा में हथियार भी जब्त किए थे.
सुरक्षा बलों ने साल 2014 से माओवादी बहुल इलाकों में शिविर लगाना शुरू किया था. साल 2019 के बाद 250 से अधिक शिविर स्थापित किए गए हैं. गृह मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक साल 2014-23 की तुलना में साल 2004-14 में नक्सली हिंसा की घटनाएं 14862 से घटकर 7128 हो गई हैं. इस दौरान सुरक्षाकर्मियों की मौत की संख्या साल 2004-14 के मुकाबले 2014-23 में 72 फीसदी कम हो गया है. ये संख्या 1750 से घटकर 485 हो गई है.
वहीं आम लोगों के मौतों की संख्या 68 फीसदी घटकर 4285 से 1383 हो गई है. साल 2010 में हिंसा वाले जिलों की संख्या 96 थी. साल 2022 में यह 53 फीसदी घटकर 45 हो गई. इसके साथ ही हिंसा की रिपोर्ट करने वाले पुलिस स्टेशनों की संख्या साल 2010 में 465 से घटकर साल 2022 में 176 हो गई. पिछले पांच वर्षों में उन 90 जिलों में 5000 से अधिक डाकघर स्थापित किए गए, जहां माओवादी की सक्रियता है. अक्सर उनका मूवमेंट देखा जाता है.

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