
64 देशों के साथ यूरोप में भी इसी साल चुनाव, क्यों इन देशों के नतीजों पर टिकी रहेंगी दुनिया की नजरें?
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भारत में लोकसभा चुनाव करीब है. बीच-बीच में अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव की भी बात हो रही है, लेकिन भारत या अमेरिका नहीं, दुनिया के 64 देशों के साथ-साथ यूरोपियन यूनियन में भी 2024 में इलेक्शन होने जा रहे हैं. दुनिया की कुल आबादी का लगभग 49% इस बार वोट देगा. माना जा रहा है कि ये साल देशों से आपसी रिश्तों से लेकर काफी कुछ बदल सकता है.
देश में आम चुनाव का आयोजन होने वाला है, जो 19 अप्रैल से सात चरणों में होगा. इस दौरान करीब 96.8 करोड़ मतदाता वोट डालेंगे. इसी तरह दुनिया की भी लगभग आधी आबादी अपने-अपने देशों में नेता चुनने वाली है. मैक्सिको से साउथ अफ्रीका, और ब्रिटेन से लेकर बेल्जियम तक कुल 80 देशों में या तो हाल में चुनाव हुए, या आने वाले कुछ महीनों में होंगे. ऐसा इतिहास में पहली बार हो रहा है. वैसे तो हर देश के लिए उसका इलेक्शन और नतीजे जरूरी हैं, लेकिन कई डेमोक्रेसीज हैं, जिनके चुनावों में जीत-हार से दुनिया पर असर होगा.
अमेरिकी जीत-हार का असर काफी वहां राष्ट्रपति चुनाव नवंबर में होंगे लेकिन भूचाल अभी से आया हुआ है. पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी एक उम्मीदवार हैं. रिपब्लिकन पार्टी से इस दावेदार पर ज्यादातर वोटर भरोसा भी दिखा रहे हैं. जैसे न्यूयॉर्क टाइम्स के एक सर्वे में 59% वोटरों ने इकनॉमी के मामले में ट्रंप पर भरोसा किया, जबकि वर्तमान राष्ट्रपति जो बाइडन पर केवल 37% ने भरोसा जताया. ये उनका अंदरुनी मामला है, लेकिन असर लगभग सभी देशों पर दिखेगा.
जैसे डेमोक्रेटिक पार्टी को कम आक्रामक माना जाता है. वहीं रिपब्लिकन समेत उसका उम्मीदवार भी बेहद आक्रामक माना जाता है. ट्रंप की बात करें तो वे रूस में वर्तमान सत्ता के करीबी माने जाते रहे, जबकि चीन से तनाव अक्सर बयानों में दिखता रहा. इन बड़े देशों के साथ रिश्तों में उतार-चढ़ाव होते ही हरेक की इकनॉमी और डिप्लोमेसी पर असर हो सकता है. जैसे जो देश अमेरिका के दोस्त हैं, देखादेखी उन्हें भी किसी से कठोर या किसी के लिए नरम लहजा अपनाना पड़ सकता है.
नए तनाव पनप सकते हैं
कुछ समय पहले ही ट्रंप ने नाटो में कम पैसे लगाने वाले सदस्य देशों से नाराजगी दिखाते हुए जरूरत में मदद न करने की धमकी दी थी. ये भी एक खतरा है. हो सकता है कि इससे वर्तमान में चल रहे युद्धों के साथ नई लड़ाइयों की जमीन तैयार हो जाए. वैसे ट्रंप के आने से इजरायल और खाड़ी देशों के रिश्ते सुधरे. उनके दौर में यूएई, बहरीन और इजरायल के बीच शांति समझौता हुआ. तो इसमें ये भी हो सकता है कि मध्यस्थता से इजरायल और हमास का तनाव थोड़ा ढीला पड़ जाए. ऐसे कई कयास एक्सपर्ट लगातार लगा रहे हैं, लेकिन इतना तय है कि वहां जो भी लीडर होगा, उसका असर दुनिया पर होगा.

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