
44 गवाह, 66 दस्तावेज और 16 सबूत... फैशन डिजाइनर आदेश बाजपेयी के कातिल को 16 साल बाद ऐसे मिली उम्रकैद की सजा
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सीबीआई को इस हत्याकांड की जांच के दौरान पता चला कि फैशन डिजाइनर आदेश बाजपेयी 4 अगस्त को मुंबई से लखनऊ आए थे और फिर 10 अगस्त को कानपुर गए थे, जहां से उनके लापता होने की सूचना मिली थी.
Fashion Designer Aadesh Bajpayee Murder Case: मुंबई के फैशन डिजाइनर आदेश बाजपेयी की हत्या के मामले में लखनऊ की एक विशेष सीबीआई अदालत ने बुधवार को आईआईटी के एक पूर्व छात्र को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच से पता चला कि बाजपेयी 10 अगस्त 2008 को अपने आरोपी दोस्त राहुल वर्मा से मिलने कानपुर आए थे और तभी से वो लापता था.
सीबीआई को इस हत्याकांड की जांच के दौरान पता चला कि फैशन डिजाइनर आदेश बाजपेयी 4 अगस्त को मुंबई से लखनऊ आए थे और फिर 10 अगस्त को कानपुर गए थे, जहां से उनके लापता होने की सूचना मिली थी. दरअसल, मृतक आदेश बाजपेयी और आरोपी राहुल वर्मा एक ग्रुप के सदस्य थे. सीबीआई प्रवक्ता ने बुधवार को पीटीआई को बताया कि आदेश बाजपेयी 10 अगस्त 2008 की रात को आरोपी राहुल वर्मा के साथ मूलगंज चौराहा, कानपुर से गए थे.
इस हत्याकांड के बाद एजेंसी ने दो मामले अपने हाथ में लिए थे. एक मामला आईआईटी-कानपुर परिसर के एक सुरक्षा गार्ड की रिपोर्ट के आधार पर एक बोरे में मानव अवशेष पाए जाने से संबंधित है. और दूसरा बाजपेयी के पिता द्वारा दर्ज कराई गई गुमशुदगी की रिपोर्ट से जुड़ा है.
सीबीआई के अनुसार, चंडीगढ़ स्थित केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (CFSL) ने खोपड़ी सुपरइम्पोजिशन परीक्षण किया. सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी, हैदराबाद ने आईआईटी-कानपुर के परिसर से बरामद हड्डियों का माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए विश्लेषण किया. और सीएफएसएल-दिल्ली ने फोरेंसिक मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन किया.
डीएनए रिपोर्ट ने निर्णायक रूप से साबित कर दिया कि आईआईटी-कानपुर में पाए गए मानव अवशेष आदेश बाजपेयी के थे. फोरेंसिक टेस्ट, विशेषज्ञों की राय और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों ने बाजपेयी की हत्या में वर्मा की भूमिका को उजागर किया. आरोपी राहुल वर्मा को 24 जनवरी 2012 को हिरासत में लिया गया था.
सीबीआई प्रवक्ता ने बताया कि दोनों मामलों में जांच के बाद, सीबीआई ने 20 अप्रैल 2012 को लखनऊ निवासी आरोपी राहुल वर्मा के खिलाफ विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट, (सीबीआई) लखनऊ की अदालत में एक सामान्य आरोप पत्र दायर किया था. मुकदमे की सुनवाई के दौरान सीबीआई ने ठोस सबूत पेश किए, 44 गवाहों से पूछताछ की और 66 दस्तावेज और 16 भौतिक वस्तुएं प्रदर्शित कीं, जिससे आरोपी को दोषी ठहराया गया.

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