
'41 युद्ध लड़े और एक भी युद्ध नहीं हारे, बाजीराव पेशवा जैसे सेनापति भारत को दोबारा नहीं मिला', बोले अमित शाह
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महाराष्ट्र के पुणे स्थित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) में अमित शाह ने बाजीराव पेशवा की प्रतिमा के अनावरण समारोह में बाजीराव की सैन्य निपुणता और समर्पण की प्रशंसा करते हुए उन्हें असाधारण सेनापति बताया जो 20 वर्षों में 41 युद्ध जीत चुके हैं. उन्होंने पुणे को स्वराज्य आंदोलन और राष्ट्र निर्माण का केंद्र भी बताया.
महाराष्ट्र के पुणे स्थित एनडीए (नेशनल डिफेन्स अकादमी) में श्रीमंत बाजीराव पेशवा के अश्वारूढ़ प्रतिमा का अनावरण केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के हाथों होने जा रहा है. पुणे के खडकवासला में प्रतिमा के अनावरण कार्यक्रम के शाह ने कहा कि भारत को फिर चाहिए बाजीराव जैसा योद्धा, जो कभी एक भी युद्ध नहीं हारा. इस कार्यक्रम के लिए मस्तानी के वंशज नवाब शादाब अली बहादुर पेशवा (नवाब ऑफ बंदा) को देर से आमंत्रण दिया गया, साथ ही आयोजकों ने उन्हें मंच पर स्थान न मिलने की जानकारी दी. इसे लेकर उन्होंने नाराज़गी जताते हुए कार्यक्रम का बहिष्कार करने की घोषणा की.
प्रतिमा के अनावरण कार्यक्रम से क्या बोले अमित शाह?
अमित शाह ने कहा, पुणे की भूमि न केवल संस्कृति और संस्कारों की जननी है, बल्कि यह स्वराज की चेतना का भी उद्गम स्थल रही है. अटक से कटक तक स्वराज का सपना सबसे पहले इसी धरती से फैला. अंग्रेजों के विरुद्ध स्वराज्य की पहली घोषणा लोकमान्य तिलक ने यहीं से की थी. वीर सावरकर ने भी राष्ट्र निर्माण की अपनी यात्रा की शुरुआत इसी पुण्यभूमि से की थी. आज जो राष्ट्रीय रक्षा अकादमी है, वह आने वाली एक सदी तक देश की सुरक्षा का सबसे सशक्त और गौरवशाली संस्थान बनी रहेगी.
युद्ध जीतने के मूल तत्त्व उन्होंने कहा, युद्ध केवल हथियारों से नहीं जीते जाते. युद्ध में समर्पण का भाव, देशभक्ति की भावना और बलिदान की तत्परता — यही वे मूल तत्त्व हैं जो सेनाओं को विजय दिलाते हैं. जब भी मुझे निराशा का अनुभव होता है, मैं छत्रपति शिवाजी महाराज और श्रीमंत बाजीराव पेशवा जैसे वीरों को स्मरण करता हूं. जिन विषम परिस्थितियों में उन्होंने स्वराज्य की स्थापना की, वही हमारे लिए आज प्रेरणा का स्रोत है. आज के दौर में हमारे सामने तो सभी परिस्थितियां अनुकूल हैं.
ऑपरेशन सिंदूर: समर्पण का उदाहरण अमित शाह बोले - स्वराज्य की स्थापना के लिए हमें जो भी करना पड़े, हम पीछे नहीं हटेंगे. हाल ही में सम्पन्न ऑपरेशन सिंदूर इसका ताज़ा उदाहरण है. छत्रपति शिवाजी महाराज ने सिर्फ स्वराज की नींव नहीं रखी, बल्कि एक महान भारत के निर्माण की संकल्पना भी दी, जिसे हमें आगे बढ़ाना है.
स्वतंत्रता का अर्थ: शिवाजी का भारत उन्होंने कहा, स्वतंत्रता का उत्सव तभी सार्थक होगा, जब हम शिवाजी द्वारा कल्पित भारत की रचना को पूर्ण समर्पण और निष्ठा से आगे ले जाएंगे. युद्ध की कला के कुछ सिद्धांत कभी पुराने नहीं होते—चाहे युग बदल जाए. युद्ध में रणनीति की व्यूह-रचना, गति (त्वरा), समर्पण, देशभक्ति और बलिदान—यही वे तत्व हैं जो विजय सुनिश्चित करते हैं. केवल हथियार और तकनीक समय के साथ बदलते हैं, पर ये मूल मूल्य अटल रहते हैं.

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