
30 दिन की कस्टडी और चली जाएगी कुर्सी… क्या केजरीवाल इफेक्ट से मिला सरकार को PM-CM हटाने वाले बिल का आइडिया?
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दिल्ली के CM रहे अरविंद केजरीवाल के अलावा मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन भी जेल जाने के बावजूद कई महीनों तक अपने पद पर बने हुए थे. तब उनके इस्तीफे की मांग को AAP ने ये कहकर खारिज कर दिया था कि संविधान में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है. इसके अलावा तमिलनाडु के मंत्री सेंथिल बाला जी का मामला भी ऐसा ही था.
केंद्र सरकार की तीन महत्वाकांक्षी बिलों का विपक्ष ने जोरदार तरीके से विरोध किया है. केंद्र आज संसद में तीन विधेयक पेश करने की योजना बना रही है, जिनमें प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री या किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के मंत्री को गंभीर आपराधिक आरोपों में लगातार 30 दिनों तक गिरफ्तार या हिरासत में रखने पर पद से हटाने का प्रावधान है.
यदि इनमें से किसी को भी ऐसे अपराधों के लिए लगातार 30 दिनों तक गिरफ्तार किया जाता है और हिरासत में रखा जाता है, जिनमें कम से कम पांच साल की जेल की सजा हो सकती है, तो वह 31वें दिन ऐसा पीएम, सीएम अथवा मंत्री अपने पद से स्वत: हटे हुए माने जाएंगे.
ये विधेयक तीन हैं - संघ राज्य क्षेत्र सरकार (संशोधन) विधेयक 2025 संविधान (एक सौ तीसवां संशोधन) विधेयक 2025 जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक 2025
गृह मंत्री अमित शाह आज इन बिलों को लोकसभा में पेश कर सकते हैं. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इन तीनों विधेयकों को संसद की संयुक्त समिति को भेजने के लिए लोकसभा में प्रस्ताव भी पेश करेंगे.
क्यों पड़ी ऐसे विधेयक की जरूरत?
दरअसल पिछले साल दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी का मामला काफी चर्चा में आया था. इसके अलावा वी सेंथिल बाला जी का मामला भी सामने आया था. ये दोनों ही नेता गिरफ्तारी के बावजूद काफी दिनों तक अपने पद से इस्तीफा नहीं दिए थे. केजरीवाल दिल्ली के शराब घोटाले में बेल मिलने से पहले 6 महीने तक जेल में रहे थे. उन्होंने जेल से ही सरकार चलाई थी. इस दौरान राजनीतिक शुचिता और सार्वजनिक जीवन में नैतिकता का मामला काफी उठा. ये ऐसा मसला था जब सरकार को ऐसे कानून की जरूरत हुई.

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