
3 घेरों की सुरक्षा प्राप्त नरेंद्र गिरि की हत्या बड़ा सवाल? बोले शंकराचार्य ओंकरानंद
AajTak
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी की मौत की गुत्थी लगातार उलझती जा रही है. एक के बाद एक कड़ियां और किरदार सामने आ रहे हैं. बता दें कि महंत नरेंद्र गिरि की मौत के बाद उनका 8 पेज का सुसाइड नोट सामने आया है. जिसमें उन्होंने आनंद गिरि, लेटे हनुमान मंदिर के पुजारी अद्या तिवारी, संदीप तिवारी को अपनी मौत के लिए जिम्मेदार बताया है. साथ ही उन्होंने कई अहम बातों का उल्लेख किया है. मामले पर सियासत भी तेज हो गई है. बीजेपी और समाजवादी पार्टी आमने सामने हैं जिनके बीच अभी भी सवाल यही बना हुआ है कि आखिर महंत ने आत्महत्या की या फिर किसी साजिश के शिकार हुए और अगर आत्महत्या की तो उसके लिए कौन जिम्मेदार है. इस पर शंकराचार्य ओंकरानंद ने आजतक के शो हल्लाबोल में कहा कि महंत नरेंद्र गिरी, जिनको 3 घेरों की सुरक्षा प्राप्त है उनकी मौत एक बड़ा सवाल पैदा कर रही है, देखें आगे क्या बोले शंकराचार्य ओंकरानंद.

आज जब वक्त इतना कीमती हो गया है कि लोग हरेक चीज की दस मिनट में डिलीवरी चाहते हैं. वहीं दूसरी तरफ विडंबना ये है कि भारत का एक शहर ऐसा है जहां इंसान को कहीं जाने के लिए सड़कों पर ट्रैफिक में फंसना पड़ता है. यहां हर साल औसतन 168 घंटे लोग ट्रैफिक में फंसे रहते हैं. यानी पूरे एक हफ्ते का समय सिर्फ ट्रैफिक में चला जाता है.

जिस शहर की फायरब्रिगेड के पास छोटे से तालाब के पानी से एक शख्स को निकालने के लिए टूल नहीं है, वह किसी बड़े हादसे से कैसे निबटेगा. युवराज मेहता की मौत ने नोएडा की आपदा राहत तैयारियां की कलई खोल दी है. सवाल यह है कि जब नोएडा जैसे यूपी के सबसे समृद्ध शहर में ये हालात हैं तो बाकी शहर-कस्बों की स्थिति कितनी खतरनाक होगी.

दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता में सुधार के कारण कमीशन ऑफ एयर क्वालिटी इंप्रवूमेंट (CAQM) ने GRAP-3 पाबंदियां हटा दी हैं. AQI में सुधार के चलते अब कंस्ट्रक्शन और आवाजाही पर लगी पाबंदियों में राहत मिली है. IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में AQI 'एवरेज' से 'खराब' श्रेणी में रह सकता है, जिसके कारण GRAP-3 के तहत गंभीर पाबंदियां लागू नहीं की जाएंगी.

AIMIM प्रवक्ता वारिस पठान ने स्पष्ट किया है कि मुसलमानों ने अब फैसला कर लिया है कि वे अब किसी भी ऐसे व्यक्ति को समर्थन नहीं देंगे जो केवल जातीय विभाजन करता है, बल्कि वे उस नेता के साथ जाएंगे जो विकास की बात करता है. उनका यह बयान समाज में सकारात्मक बदलाव और विकास को प्राथमिकता देने की दिशा में है. मुसलमान अब ऐसे नेताओं के साथ खड़े होंगे जो उनकी बेहतरी और समाज के समग्र विकास के लिए काम करें.









