
2024 से पहले BJP-कांग्रेस के बीच आखिरी जंग तेलंगाना में, लेकिन KCR को टेंशन नहीं
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तेलंगाना में 10 साल सरकार चलाने के बाद भी मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव का दबदबा बना हुआ है. बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही एड़ी चोटी का जोर लगाकर भी केसीआर से ज्यादा आपस में ही रेस लगाये हुए हैं - केसीआर अगर हैट्रिक भी बना लें तो, बड़ी वजह बीजेपी और कांग्रेस की कमजोर चुनौती ही जिम्मेदार मानी जाएगी.
तेलंगाना विधानसभा के लिए चुनाव के प्रचार आखिरी घंटे दौर में है. 30 नवंबर को होने वाले मतदान के लिए सत्ताधारी BRS, कांग्रेस और बीजेपी ने एक-दूसरे के खिलाफ आक्रामक तेज कर दिया है. कोशिश तो शुरू से ही मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की रही है, लेकिन दोनों ही राजनीतिक विरोधियों के निशाने पर होने के बावजूद मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव का पूरा परिवार कांग्रेस और बीजेपी से डट कर मुकाबला कर रहा है - नेताओं के भाषण सुन कर तो ऐसा ही लगता है.
केसीआर की तैयारियों को थोड़ा अलग रख कर देखें तो बीजेपी ने विधानसभा चुनावों की तैयारी 2020 के बिहार चुनाव के साथ ही शुरू कर दी थी. हैदराबाद में जुलाई, 2022 में बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के बाद तो जैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी नेता अमित शाह ने मुख्यमंत्री केसीआर और उनके परिवार पर धावा ही बोल दिया था.
बीजेपी के मुकाबले देर से शुरुआत के बावजूद कांग्रेस ने खुद को बीआरएस से सीधे मुकाबले में ला दिया. राहुल गांधी भी बीजेपी की ही तरह मुख्यमंत्री केसीआर पर परिवारवाद और भ्रष्टाचार के आरोप लगाते रहे हैं. अब तो एक नया स्लोगन भी गढ़ लिया है - 'मोदी जी के दो यार... ओवैसी और केसीआर.'
बीजेपी वाली स्टाइल में राहुल गांधी, केसीआर की तेलंगाना सरकार को देश की सबसे भ्रष्ट सरकार बता रहे हैं - और पूछ रहे हैं, केसीआर ने तेलंगाना के लिए किया क्या है?
और तभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पलट कर बोलते हैं, कांग्रेस और BRS एक-दूसरे की कार्बन कॉपी हैं - और दोनों की पहचान भ्रष्टाचार और परिवारवाद से ही है.
तेलंगाना में वोट के बदले नोट का खेल

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