
11 दिन की जंग में 4200 मौतें... दुनिया में बेचैनी, आज जर्मन चांसलर तो कल बाइडेन करेंगे इजरायल का दौरा
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इजरायल और हमास के लड़ाकों में 11 दिन से जंग चल रही है. इस बीच, मंगलवार को जर्मन चांसलर ओलाफ स्कोल्ज इजरायल दौरे पर पहुंच रहे हैं. जबकि बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन इजरायल जाएंगे और हमास के खिलाफ युद्ध में नेतन्याहू को समर्थन देंगे.
इजरायल और हमास के बीच 11 दिन से जंग चल रही है. दोनों तरफ से मिसाइलें और रॉकेट से हमले किए जा रहे हैं. दोनों देशों में करीब 4200 लोगों की जान गई है. इस युद्ध से पूरी दुनिया में बेचैनी देखी जा रही है. पहले अमेरिकी रक्षा मंत्री ने इजरायल और अरब देशों का दौरा किया और आतंक के खिलाफ कार्रवाई का समर्थन जुटाया. अब जर्मन चांसलर भी मंगलवार को इजरायल पहुंचे हैं. इतना ही नहीं, बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन भी इजरायल और मिडिल ईस्ट का दौरा करेंगे और युद्ध के हालात के बारे में जानकारी लेंगे.
बता दें कि हमास के लड़ाकों ने 7 अक्टूबर को अचानक इजरायल में घुसपैठ कर दी थी और दक्षिणी इलाके के शहरों में बर्बरता की थी. वहां हमलों में 1,300 लोगों की मौत हो गई थी. बड़ी संख्या में इजरालियों को बंधक बना लिया था और गाजा ले गए थे. हमास के हमले के बाद इजरायल ने युद्ध का ऐलान किया और गाजा पट्टी को घेर लिया. वहां तब से इजरायल की तरफ से हमास के लड़ाकों को सफाया करने के लिए अभियान चलाया जा रहा है.
'हमास को फिलिस्तीनियों के समर्थन में बोलने का अधिकार नहीं'
इजरायल के समर्थन में जर्मनी भी आया था. अब मंगलवार को जर्मन चांसलर ओलाफ स्कोल्ज इजरायल दौरे पर पहुंच रहे हैं. उनका एक बयान भी आया है. स्कोल्ज ने कहा, हमास को फिलिस्तीनियों की ओर से बोलने का कोई अधिकार नहीं है. स्कोल्ज ने कहा, फिलिस्तीनी, हमास नहीं हैं और हमास को उनकी ओर से बोलने का कोई अधिकार नहीं है. गाजा पट्टी की फिलिस्तीनी आबादी भी हमास से पीड़ित है. इससे पहले इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गाजावासियों तक मानवीय सहायता पहुंचाने पर सहमति जताई थी.
'जर्मनी ने गाजा में मानवीय पहल की वकालत की'
स्कोल्ज ने कहा, हमारा साझा लक्ष्य है. हम क्षेत्र में संघर्ष, व्यापक युद्ध से बचना चाहते हैं. उन्होंने लेबनान समर्थित हिजबुल्लाह और ईरान से युद्ध में हस्तक्षेप ना करने का आह्वान किया. स्कोल्ज ने गाजा पट्टी तक मानवीय पहुंच की वकालत की. बता दें कि इजरायल और मिस्र के साथ बंद सीमाओं के कारण फिलिस्तीनियों के पास कहीं और जाने के लिए रास्ता नहीं है.

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