
खौफ, धमकियां और जंग के मुहाने पर दुनिया... वैश्विक टकराव की वजह तो नहीं बन जाएगी ईरान की बगावत!
AajTak
ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों में अब तक हजारों लोगों की मौत हो चुकी है. अयातुल्ला अली खामेनेई की हुकूमत ने प्रदर्शनकारियों को कुचलने के लिए फांसी जैसे खौफनाक कदम उठाने का फैसला किया तो अमेरिका ने सीधे एक्शन की चेतावनी दे डाली. हालांकि बाद में ईरान और ट्रंप के ताजा बयानों ने दुनिया को थोड़ी राहत दी. मगर ईरान संकट अब सिर्फ एक देश का नहीं, बल्कि वैश्विक टकराव का संकेत बनता जा रहा है.
Iran Protests 2026: ईरान की ताजा तस्वीरें सिहरन पैदा करती हैं. हर तरफ सिर्फ आग ही आग है. शहर-शहर सड़कों पर लोगों का हुजूम हुक्मरानों के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहा है और आवाम के गुस्से से घबराई हुकूमत अपने ही लोगों का नरसंहार कर रही है. लाशों के ढेर, रोते बिलखते लोग. गम और गुस्से का इजहार. नए साल पर ये पहला मौका है, जब लोगों ने एक साथ बहुत सी लाशें देखी हैं. और इन तस्वीरों ने सिर्फ ईरान ही नहीं पूरी दुनिया को सकते में डाल दिया है. ये वो बदनसीब ईरानी शहरी हैं, जिन्हें शासन के खिलाफ आवाज उठाने की कीमत अपनी जान गंवा कर चुकानी पड़ी. और अगर ईरान से आए ताज़ा आंकड़ों पर यकीन करें, तो महज पखवाड़े भर के इस विरोध प्रदर्शन में मरने वालों की तादाद अब 2500 को पार कर चुकी है.
साफ है इस आंदोलन को कुचलने के लिए अयातुल्ला अली खामनेई किसी भी हद से गुजरने को तैयार दिखते हैं. जुल्मो-सितम वाले इस्लामिक राज और खस्ताहाल माली हालत से आजिज ईरान के लोगों की इस आवाज को दबाने के लिए वहां की हुकूमत ने अब खौफ से भरी चाल चली है. अब तक ईरानी फौज सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे लोगों को अपनी गोलियों का निशाना बना रही थी, और अब खामेनेई ने कुछ प्रदर्शनकारियों को बीच चौराहे में फांसी पर लटका देने का फैसला किया है.
समझा जाता है कि ऐसा करने के पीछे उनका इरादा लोगों में डर पैदा करना है. लेकिन अमेरिका ने साफ कर दिया है कि अगर ईरान अपने प्रदर्शनकारियों को फांसी देता है तो वो ईरान पर सीधी कार्रवाई करेगा. जाहिर है ईरान के हालात लगातार बिगड़ रहे हैं. केस कितना खतरनाक है, इसका अंदाजा आप बस इसी बात से लगाएं कि अब तो भारत के विदेश मंत्रालय ने भी तेहरान में रह रहे भारतीयों से जल्द से जल्द तेहरान छोड़ देने की एडवाजरी जारी कर दी है.
अमेरिका की तैयारी ये इशारा करती है कि शायद इस बार अमेरिका ईरान को सबक सिखाने का ये मौका हाथ से जाने नहीं देना चाहता. ईरान पर हमले की तैयारी के तौर पर अब अमेरिका ने करीब 50 टार्गेट का चुनाव किया है, जहां अमेरिका एरियल अटैक कर सकता है. यूनाइटेड अगेंस्ट न्यूक्लियर ईरान नाम के एक अमेरिकी एनजीओ ने ऐसे 50 टार्गेट की हिट लिस्ट व्हाइट हाउस के हवाले की है.
जिसमें ईरान के हाई प्रोफाइल इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स के थरल्लाह हेडक्वार्टर का नाम भी शामिल है. इसके अलावा अमेरिका के टार्गेट लिस्ट में उत्तरी और उत्तर पश्चिमी तेहरान में मोर्चा संभालने वाले कुद्स सब हेडक्वार्ट्स, दक्षिण पश्चिम के फतेह सब हेडक्वार्ट्स, उत्तर पूर्व के नसर सब हेडक्वार्टर्स और उत्तर पूर्व, दक्षिण पूर्व और सेंट्रल तेहरान में सुरक्षा की जिम्मेदारी लेने वाले ग़द्र सब हेडक्वार्टर्स का नाम शामिल है. एक तरह से देखा जाए तो अमेरिका ने ईरान को घुटनों पर लाने की पूरी तैयारी कर ली है.
अब बात आंदोलन को कुचलने के फैसले की. 26 साल का एक नौजवान धधकते ईरान की बेबसी का सबसे ताजा चेहरा है- नाम है इरफान सुल्तानी. ईरान की सरकार ने सुल्तानी को बीच चौराहे पर फांसी पर लटकाने का फैसला किया है. और जानते हैं, उसका जुर्म क्या है? तो सुनिए, उसका जुर्म है ईरानी हुकूमत के खिलाफ सड़कों पर विरोध प्रदर्शन करने वाले हजारों लोगों में उसका भी शामिल होना. सुल्तानी को सरकार विरोधी प्रदर्शन के जुर्म में 8 जनवरी को गिरफ्तार किया गया था और उसकी गिरफ्तारी के सिर्फ 5 दिन बाद उसके घर वालों को उसे दी जाने वाली सजा-ए-मौत की जानकारी दी गई. हालांकि बाद में ये फैसला टाल दिए जाने की खबर आई.

भारत की विदेश नीति में राजनयिक तंत्र और राजनीतिक दबाव के बीच अंतर दिख रहा है. बांग्लादेश के साथ रिश्तों में नरमी के संकेत मिलने के बाद भी क्रिकेटर मुस्ताफिजुर रहमान को आईपीएल से हटाने का फैसला विवादित रहा है. इस फैसले के बाद बांग्लादेश ने भी कह दिया है कि वो टी20 वर्ल्ड कप में भारत के खिलाफ मैच नहीं खेलेगा.

अमेरिका ने 21 जनवरी से 75 देशों के लिए इमिग्रेंट वीजा प्रक्रिया पर अनिश्चितकालीन रोक लगाकर सख्ती बढ़ा दी है. हैरानी की बात यह है कि इस लिस्ट में पाकिस्तान-बांग्लादेश के साथ कुवैत, थाईलैंड और ब्राजील जैसे देश भी शामिल हैं. इस फैसले ने मानदंडों को लेकर विशेषज्ञों और प्रवासियों के बीच नई बहस छेड़ दी है.

ग्रीनलैंड में अमेरिका और नाटो देश अब सीधे आमने सामने आ गए हैं. ऑपरेशन आर्कटिक एंड्योरेंस के तहत स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, नार्वे समेत कई यूरोपीय देशों ने ग्रीनलैंड की राजधानी नूक में अपनी सेनाएं भेजनी शुरू कर दी है. यह कदम डोनाल्ड ट्रंप के बार-बार के बयानों के बाद उठाया गया है. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने घोषणा की है कि फ्रांस की सेना का पहला दस्ते पहले ही रवाना हो चुका है और आगे और सैनिक भेजे जाएंगे.

ईरान में जारी हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बीच एक कनाडाई नागरिक की मौत हो गई है. कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद ने गुरुवार को इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि ईरानी अधिकारियों के हाथों इस नागरिक की जान गई है. कनाडा ने इस घटना पर कड़ा रुख अपनाते हुए ईरानी शासन की निंदा की है और नागरिकों के खिलाफ हो रही हिंसा को तत्काल रोकने की मांग की है.

अमेरिका ने ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के हिंसक दमन के आरोप में ईरानी सुरक्षा अधिकारियों और तेल से जुड़े शैडो बैंकिंग नेटवर्क पर नए प्रतिबंध लगाए हैं. ट्रेजरी विभाग के अनुसार, इन नेटवर्कों के जरिए अरबों डॉलर की मनी लॉन्ड्रिंग की जा रही थी. कार्रवाई ट्रंप प्रशासन की अधिकतम दबाव नीति का हिस्सा है.








