
102 लोकसभा सीटों पर मतदान पूरा, जानें पहले चरण में पॉलिटिकल विज्ञापनों पर कितना हुआ खर्च
AajTak
लोकसभा चुनाव 2024 के पहले चरण में राजनीतिक दलों ने ऑलनाइन विज्ञापनों पर खूब खर्च किया है. बीजेपी ने पहले चरण के विज्ञापनों पर सबसे ज्यादा 14.7 करोड़ रुपये खर्च किए. इसके बाद कांग्रेस और डीएमके जैसी पार्टियों का नंबर है, जिन्होंने अपने विज्ञापनों में खासतौर पर तमिलनाडु के मतदाताओं को टारगेट किया.
लोकसभा चुनाव के पहले चरण का मतदान खत्म हो गया है. पहले चरण के इस चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों ने अपने चुनावी एजेंडे, नीतियों, घोषणापत्र और उपलब्धियों के प्रचार में 36.5 करोड़ रुपये खर्च किए हैं. पार्टियों ने अपने प्रचार-प्रसार के लिए गूगल और मेटा को प्रमुखता दी. इसके विश्लेषण से पता चलता है कि कांग्रेस ने सुस्त शुरुआत जरूर की लेकिन विज्ञापन खर्च के मामले में पार्टी बीजेपी से पीछे भी नहीं है.
बीजेपी ने गूगल विज्ञापन पर 14.7 करोड़ रुपये खर्च किए, जबकि कांग्रेस ने 15 मार्च से 13 अप्रैल के बीच गूगल प्लेटफॉर्म पर 12.3 करोड़ रुपये अपने प्रचार में लगाए. कांग्रेस की ही सहयोगी डीएमके ने अपने गूगल विज्ञापन पर 12.1 करोड़ रुपये खर्चे हैं. बीजेपी की खासा पसंद गूगल रही है, जहां पार्टी ने कुल विज्ञापनों का 81 फीसदी हिस्सा खर्च किया है. वहीं कांग्रेस ने अपने विज्ञापन खर्च का 78 फीसदी गूगल पर खर्च किया है.
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी की वाईएसआर कांग्रेस कुल ऑनलाइन विज्ञापन खर्च के मामले में तीसरे स्थान पर रही. इसके बाद टीएमसी, बीजेडी और टीडीपी जैसी पार्टियां रहीं. दिलचस्प बात ये है कि मेटा पर टॉप पांच 'पॉलिटिकल एडवर्टाइजर्स' के रूप में चल रहे मीम पेज ने बीजेडी और टीडीपी जैसी क्षेत्रीय पार्टियों से ज्यादा खर्च किया है.
राजनीतिक दलों का फोकस
देश में शुक्रवार को 102 लोकसभा सीटों पर वोटिंग हुई, जिनमें 39 सीटें अकेले तमिलनाडु की हैं. ऑनलाइन विज्ञापन में भी इसी पैटर्न को देखा गया, जहां सबसे ज्यादा सीटों पर चुनाव हुए. मसलन, पहले चरण के दौरान विज्ञापन में राजनीतिक दलों ने तमिलनाडु को ही टारगेट किया है. गूगल और मेटा पर पॉलिटिकल कैटगरी के विज्ञापन में विशेष रूप से तमिलनाडु पर ही पार्टियों का फोकस रहा, जहां कुल विज्ञापन खर्च का 17.1 करोड़ रुपये खर्च किया गया है.
तमिल मतदाताओं को टारगेट करने वाले विज्ञापनों पर बीजेपी ने 1.7 करोड़ और डीएमके ने 11 करोड़ रुपये खर्च किए हैं. वहीं कांग्रेस ने तमिलनाडु में मतदाताओं को टारगेट करने वाले विज्ञापनों पर 7.8 लाख रुपये खर्च किए. डीएमके जहां तमिलनाडु में 30 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ रही है, वहीं सहयोगी कांग्रेस बाकी नौ सीटों पर जीत की उम्मीद में है. बीजेपी के उम्मीदवार 23 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं.

दिल्ली के सदर बाजार में गोरखीमल धनपत राय की दुकान की रस्सी आज़ादी के बाद से ध्वजारोहण में निरंतर उपयोग की जाती है. प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल के बाद यह रस्सी नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाने लगी. इस रस्सी को सेना पूरी सम्मान के साथ लेने आती है, जो इसकी ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्ता को दर्शाता है. सदर बाजार की यह रस्सी भारत के स्वाधीनता संग्राम और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बनी हुई है. देखिए रिपोर्ट.

संभल में दंगा मामले के बाद सीजेएम के तबादले को लेकर विवाद शुरू हो गया है. पुलिस के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए गए थे लेकिन पुलिस ने कार्रवाई नहीं की. इस पर सीजेएम का अचानक तबादला हुआ और वकील प्रदर्शन कर रहे हैं. समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और AIMIM ने न्यायपालिका पर दबाव बनाने का आरोप लगाया है. इस विवाद में राजनीतिक सियासत भी जुड़ी है. हाई कोर्ट के आदेशानुसार जजों के ट्रांसफर होते हैं लेकिन इस बार बहस हुई कि क्या यहां राज्य सरकार ने हस्तक्षेप किया.

दावोस में भारत वैश्विक आर्थिक चुनौतियों का सामना करने और एक बेहतर भविष्य बनाने के लिए पूरी तैयारी कर रहा है. इस संदर्भ में सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव से खास बातचीत की गई जिसमें उन्होंने बताया कि AI को लेकर भारत की क्या योजना और दृष्टिकोण है. भारत ने तकनीकी विकास तथा नवाचार में तेजी लाई है ताकि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे रह सके. देखिए.

महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनावों के बाद ठाणे जिले के मुंब्रा क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. एमआईएम के टिकट पर साढ़े पांच हजार से अधिक वोट के अंतर से जीत हासिल करने वाली सहर शेख एक बयान की वजह से चर्चा में हैं. जैसे ही उनका बयान विवादास्पद हुआ, उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका बयान धार्मिक राजनीति से जुड़ा नहीं था. सहर शेख ने यह भी कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है और वे उस तरह की राजनीति का समर्थन नहीं करतीं.

नोएडा के सेक्टर 150 में इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत के बाद योगी सरकार ने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है. हादसे के जिम्मेदार बिल्डर अभय कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि नोएडा अथॉरिटी के अधिकारियों पर भी गाज गिरी है. प्रशासन ने अब भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम शुरू कर दिए हैं.

महाराष्ट्र के ठाणे में तीन नाबालिग लड़कियों के लापता होने से सनसनी फैल गई. कल्याण के बारावे गांव से दो सगी बहनें और उनकी 13 साल की भांजी घर से निकलने के बाद वापस नहीं लौटीं. परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. एक अहम सूचना के आधार पर पुलिस टीम को लखनऊ भेजा गया है, जहां लड़कियों की तलाश की जा रही है.

छत्तीसगढ़ के रायपुर में मिड-डे मील योजना से जुड़े हजारों रसोइया और सहायिकाएं अपनी मांगों को लेकर तूता मैदान में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं. रसोइया संघ के अध्यक्ष के अनुसार, उन्हें मात्र 66 रुपये प्रतिदिन मानदेय मिलता है, जो उनके परिवार का खर्च चलाने के लिए अपर्याप्त है. ठंड के बावजूद वे 22 दिनों से धरना दे रहे हैं पर शासन के कोई प्रतिनिधि उनसे अब तक नहीं मिले हैं.

आठवीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य ने चार शंकराचार्य पीठों की स्थापना की. उद्देश्य था हिंदू धर्म और दर्शन को बचाना और आगे बढ़ाना. ऐसा हुआ भी. लेकिन पिछली एक सदी में कई और शंकराचार्य पीठ गढ़ ली गईं. इन पर बैठने वालों में कलह आम हुई. चुनावी लाभ, उत्तराधिकार का झगड़ा, राजनीतिक हस्तक्षेप, और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं ने इस पद को धार्मिक से ज्यादा राजनीतिक बना दिया है.





