
10 साल पुरानी कारों को कोर्ट रोक सकता है, खतरनाक पुराने विमानों को क्यों नहीं?
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हमारे देश में 10 साल पुरानी कारों को लोगों को लिए खतरा मान लिया जाता है पर खतरनाक विमानों के लिए कोई आयु सीमा नहीं निर्धारित नहीं की गई है. अगर पलूशन जांच के बाद भी कारें सड़कों पर नहीं चल सकतीं तो जांच के सहारे पुराने से पुराना विमान भी आकाश में क्यों उड़ रहा है?
देश के करीब सभी बढ़े शहरों में सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए 10 साल से पुरानी डीजल कारें और 15 साल से पुरानी पेट्रोल कारें नहीं चल सकती हैं. चाहे वो कारें जीरों परसेंट पलूशन फैलाती हों उन्हें स्क्रैप करना ही होगा. जब से अहमदाबाद में एयर इंडिया के 12 साल पुराने विमान का क्रैश हुआ है लोग सवाल उठा रहे हैं आखिर इन पुराने और खामियों वाले विमानों को बंद करने के लिए हमारे देश की न्यायपालिका का विवेक क्यों नहीं जागता है? सोशल मीडिया पर ऐसे सवाल हजारों लोग पूछ रहे हैं. जाहिर है कि उनकी बातों में दम तो है.
दिल्ली-एनसीआर सहित देश के करीब बड़ी शहरों में सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने 2015-2018 के फैसलों के तहत प्रदूषण नियंत्रण के लिए 10 साल पुरानी डीजल कारों और 15 साल पुरानी पेट्रोल कारों पर प्रतिबंध लगाया है. यह नीति राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) और BS-6 उत्सर्जन मानकों के अनुरूप है. दिल्ली में 10 साल पुरानी डीजल कारों को स्क्रैप करना अनिवार्य है, और उनका पंजीकरण रद्द हो जाता है.
भारत में विमानों की उम्र सीमा नहीं
नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) और अंतरराष्ट्रीय नागर विमानन संगठन (ICAO) के नियमों के तहत, भारत में विमानों के लिए कोई निश्चित उम्र सीमा नहीं है. इसके बजाय, विमानों की उड़ान योग्यता (airworthiness) उनकी तकनीकी स्थिति, रखरखाव, और नियमित निरीक्षणों पर निर्भर करती है. बोइंग 787-8, जो अहमदाबाद में दुर्घटनाग्रस्त हुआ, 11.5 साल पुराना था और अपनी डिज़ाइन जीवन अवधि (44,000 उड़ान चक्र या 30-50 वर्ष) के भीतर था. एयर इंडिया और स्पाइसजेट जैसे वाहक 10-20 साल पुराने विमानों का उपयोग करते हैं.
कहने को विमानन उद्योग में उम्र के बजाय रखरखाव और सुरक्षा मानकों पर जोर दिया जाता है. DGCA और FAA (फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन) नियमित ऑडिट, जैसे C-चेक (हर 18-24 महीने) और D-चेक (हर 6-10 साल), अनिवार्य करते हैं. सवाल उठता है कि इस तरह की व्यवस्था कारों के सिलसिले में क्यों नहीं की जा सकती है? दरअसल सवाल में ही जवाब छुपा हुआ है. कारों पर रोक लगाने में कार कंपनियों को फायदा है. इसके ठीक विपरीत विमानों की आयु निर्धारण से विमान कंपनियों को बहुत घाटा है. मतलब आदमी के जान की कीमत दोनों ही पक्षों में गौण हो जाती है. फायदा दोनों ही पक्षों में महत्वपूर्ण हो जाता है.
कारें कम जानलेवा फिर भी उनके लिए कठोर कानून

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