
हिमाचल के 'समोसा कांड' की पूरी कहानी, जिसने कांग्रेस सरकार में मचाई हलचल
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मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने पूरे मामले को गलत प्रचार बताया है. सरकार ने ऐसी कोई जांच करने के आदेश नहीं दिए. नरेश चौहान ने कहा इस मामले से सरकार का कोई लेना देना नहीं है. सीआईडी विभाग अपने स्तर पर मामले की जांच कर रहा है. आखिर मुख्यमंत्री को परोसे जाने वाली रिफ्रेशमेंट किसको दी गई.
मौजूदा वक्त में भारत और अमेरिका दोनों जगह समोसे की चर्चा हो रही है. डोनाल्ड ट्रंप के जीतने के बाद समोसा कॉकस मजबूत हुआ है और हिंदुस्तान के अंदर हिमाचल प्रदेश में समोसा कांड हुआ है, जिससे सूबे की सरकार में हलचल मच गई है. समोसा कांड होने के बाद इस मामले की जांच सीआईडी को सौंपी गई. अब जांच की रिपोर्ट भी आ गई है, जिसमें सामने आया है कि मुख्यमंत्री के लिए समोसा और केक मंगवाया गया था लेकिन यह कर्मचारियों को सर्व कर दिया गया.
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू 21 अक्टूबर को CID मुख्यालय पहुंचे थे. यहां पर उनके लिए तीन बॉक्सेज में समोसे और केक मंगवाए गए थे. लेकिन हुआ यूं कि ये फूड आइटम्स सीएम के पास पहुंचने के बजाय सुरक्षाकर्मियों को सर्व कर दिया गया. इसके बाद इस पूरे मामले पर सीआईडी जांच बैठाई गई.
CID ने अपनी रिपोर्ट में क्या बताया है?
सीआईडी ने जांच किया है कि किसकी गलती से मुख्यमंत्री के लिए लाए गए समोसे और केक सीएम के स्टाफ को परोसे गए. जांच रिपोर्ट पर एक सीनियर अधिकारी ने लिखा- यह कृत्य 'सरकार और सीआईडी विरोधी' है. 21 अक्टूबर को सीएम एक कार्यक्रम के लिए सीआईडी मुख्यालय गए थे. सीएम की जगह गलती से समोसे और केक सीएम के स्टाफ को परोसे गए.
जांच में पता चला है कि किस अधिकारी और कर्मचारी की गलती के कारण सीएम के लिए लाए गए खाद्य पदार्थ सीएम के स्टाफ को परोसे गए. दिलचस्प बात यह है कि एक उच्च पदस्थ अधिकारी ने इस जांच रिपोर्ट पर नोटिंग में लिखा है कि जांच रिपोर्ट में नामित सभी लोगों ने 'सीआईडी विरोधी और सरकार विरोधी' तरीके से काम किया है, जिसके कारण ये चीजें वीवीआईपी को नहीं दी जा सकीं. यह भी लिखा है कि इन लोगों ने अपने एजेंडे के अनुसार काम किया है.

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