
हिंदू ही नहीं, इस्लाम और यहूदी धर्म में भी खानपान पर सख्ती, Israel की संसद में कोशर ही उपलब्ध, क्या है ये?
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तिरुपति मंदिर के लड्डू प्रसादम को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है. आंध्र प्रदेश की तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) ने दावा किया कि इसमें जानवरों की चर्बी का इस्तेमाल किया गया, जो कि हिंदुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ है. मामले की सीबीआई जांच की मांग हो रही है. वैसे हिंदू अकेला धार्मिक समुदाय नहीं, जिसमें खानपान पर परहेज हो. यहूदी देश इजरायल में नियम इतना सख्त है कि संसद से लेकर सरकारी इमारतों में धार्मिक लिहाज से शुद्ध खाना ही मिलेगा.
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार में तिरुपति मंदिर का लड्डू बनाने में पशु चर्बी का उपयोग हो रहा था. इसके बाद से पूरे देश का माहौल गरमाया हुआ है. राज्य कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष वाईएस शर्मिला ने केस की सीबीआई जांच की मांग करते हुए इसे करोड़ों हिंदुओं की धार्मिक भावना पर चोट बताया. कई दूसरे देशों में भी खाने में धार्मिक प्रतिबंध रहता आया है, जैसे इजरायल में कोशर की मान्यता है. इसे लेकर गैर-धार्मिक या दूसरे महजब के लोग नाराज भी होते रहे.
एयरपोर्ट में हो चुका बड़ा विवाद
साल 2016 में इजरायल के इंटरनेशनल एयरपोर्ट बेन गुरियन को लेकर एयरपोर्ट अथॉरिटी ने एक बड़ा फैसला लिया. उन्होंने वहां मौजूद सभी फूड स्टॉल और रेस्त्रां में सिर्फ कोशर भोजन पकाना और परोसना शुरू किया. यहूदी लोग सिर्फ कोशर खाना खाते हैं, जिसका मतलब है शुद्ध. इसमें जानवरों को काटने या पकाने की अलग प्रोसेस है.
धार्मिक यहूदियों ने तो इसे पसंद किया लेकिन उदारवादी नाराज हो गए. वे कहने लगे कि गैर-धार्मिक या दूसरा मजहब मानने वालों के साथ नाइंसाफी हो रही है. विदेशी यात्री भी नाराज होने लगे. आखिरकार एयरपोर्ट को इसमें कुछ ढील देनी पड़ी. अब वहां कोशर और गैर-कोशर दोनों तरह का खाना मिलता है.
सरकारी दफ्तरों में शुद्धता पर जोर
इजरायल की संसद और सभी सरकारी इमारतों में पूरी तरह से वही खाना मिलेगा, जो यहूदी धर्म में शुद्ध कहलाए. इसपर भी कई धर्मनिरपेक्ष सांसद नाराजगी जता चुके. इसपर इजरायली सरकार ने तर्क दिया कि वे चाहें तो शाकाहारी भोजन चुन सकते हैं, जिसमें कोशर या नॉन-कोशर जैसा झंझट नहीं लेकिन संसद समेत तमाम सरकारी जगहों पर यहूदी खाना ही मिलेगा. यहूदी देश की सेना को भी कोशर डायट ही मिलती रही.

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