
हर साल लाखों स्ट्रे डॉग्स शेल्टर में मारे जा रहे, क्यों अमेरिका जैसे विकसित देश में यूथेनेशिया को मिली हुई है मंजूरी?
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19वीं सदी में न्यूयॉर्क शहर स्ट्रे डॉग्स से भरा हुआ था. कई बार डॉग कैचर उन्हें पकड़कर ले जाते और नदियों में डुबोकर खत्म कर देते थे. शहर को डॉग-फ्री करने का यही तरीका वहां सबसे कॉमन था. वक्त सरका. अमेरिका सुपर पावर और एनिमल लवर देश बना. लेकिन स्ट्रे डॉग्स को लेकर कुछ खास नहीं बदल सका.
स्ट्रे डॉग्स पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से देशभर में हलचल मची हुई है. अदालत ने दरअसल कुत्तों के आतंक की घटनाओं के बीच फैसला दिया कि स्ट्रे डॉग्स को शेल्टर्स में भेजा जाए. इसे लेकर दो धड़े हो गए. फिलहाल इस मामले पर कोर्ट ने अपना निर्णय सुरक्षित रखा है. इस बीच बार-बार ये सवाल उठ रहा है कि अमेरिका या दूसरे बड़े देशों में स्ट्रे डॉग्स के साथ क्या होता है? क्यों वहां सड़कों पर बहुत कम कुत्ते नजर आते हैं? क्या उन्हें अडॉप्ट कर लिया जाता है, या कुछ और भी हो रहा है?
अमेरिका में शेल्टर के बगैर रहते इंसान तो दिखेंगे लेकिन डॉग्स या दूसरे पशु नहीं. लगभग डेढ़ सदी पहले हालात एकदम अलग थे. टाइम ट्रैवल करते हुए 19वीं सदी के न्यूयॉर्क जाएं तो वहां सड़कों पर कुत्ते आपस में लड़ते या लोगों पर हमले करते दिख जाएंगे. यही वक्त था जब न्यूयॉर्क सिटी के प्रशासन ने कई आक्रामक नियम बनाए और तय किया कि सड़कें डॉग-फ्री रहें.
डॉग पाउंड बनाए गए, जहां सड़कों पर घूमते डॉग्स को रखा जाने लगा. हालांकि ये शेल्टर नहीं थे, जहां उनका पूरा ध्यान रखा जाए, बल्कि उन्हें नदियों में डुबोकर मारा जाने लगा. ये प्रैक्टिस न्यूयॉर्क से बाकी शहरों तक पहुंच गई. बल्कि और ज्यादा भयावह रूप लेते हुए. जानवरों को मारा जाने लगा और उनकी चरबी और हड्डियों का कमर्शियल इस्तेमाल होने लगा.
इसी बीच पशुप्रेमी सक्रिय हुए. अमेरिकन सोसायट फॉर प्रिवेंशन ऑफ क्रुएलिटी टू एनिमल्स ने भारी विरोध किया. इसके बाद डॉग पाउंड की बजाए मॉडर्न शेल्टर का कंसेप्ट आया. अब हर शहर में एनिमल कंट्रोल डिपार्टमेंट होता है, जिनकी टीम शिकायत मिलने पर या रूटीन पेट्रोलिंग के दौरान कुत्तों को पकड़कर एनिमल शेल्टर में ले जाती है. वहां स्ट्रे डॉग्स को पब्लिक सेफ्टी रिस्क माना जाता है, मसलन, काटने का खतरा, सड़क हादसों की आशंका या बीमारियों का फैलना.
सड़कों पर घूमते कुत्तों को शेल्टर ले जाते ही उनका मेडिकल चेकअप होता है. इसी बीच देखा जाता है कि कहीं वह पहले से किसी का पालतू तो नहीं. इसके लिए माइक्रोचिपिंग का सिस्टम है. ज्यादातर पालतू जानवरों में माइक्रोचिप लगाई जाती है, जिससे मालिक का पता आसानी से चल सके. पता लगने पर डॉग उसके मालिक को लौटा दिया जाता है.

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