
हरियाणा और जम्मू-कश्मीर में किसकी बनेगी सरकार? कल आएंगे विधानसभा चुनाव के नतीजे
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हरियाणा और जम्मू-कश्मीर यानी दोनों ही जगह 90-90 विधानसभा सीटों के लिए मतदान हुआ था. जम्मू कश्मीर में तीन फेज (18 सितंबर, 25 सितंबर और एक अक्टूबर) को वोटिंग हुई थी, तो हरियाणा में सिर्फ एक फेज यानी 5 अक्टूबर को मतदान हुआ था. हरियाणा में जहां पिछले 10 साल से बीजेपी की सरकार थी, तो वहीं जम्मू-कश्मीर में 10 साल बाद विधानसभा चुनाव हुए हैं.
हरियाणा और जम्मू-कश्मीर की सत्ता पर अगले 5 साल के लिए कौन राज करेगा, इसका फैसला मंगलवार (8 अक्टूबर) को हो जाएगा. दोनों राज्यों में वोटों की गिनती सुबह 8 बजे से शुरू होगी. इसे लेकर सुरक्षा व्यवस्था समेत सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. हरियाणा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी पंकज अग्रवाल ने कहा कि मतगणना स्थलों पर तीन लेयर की सुरक्षा व्यवस्था की गई है. हरियाणा और जम्मू-कश्मीर यानी दोनों ही जगह 90-90 विधानसभा सीटों के लिए मतदान हुआ था. जम्मू कश्मीर में तीन फेज (18 सितंबर, 25 सितंबर और एक अक्टूबर) को वोटिंग हुई थी, तो हरियाणा में सिर्फ एक फेज यानी 5 अक्टूबर को मतदान हुआ था. हरियाणा में जहां पिछले 10 साल से बीजेपी की सरकार थी, तो वहीं जम्मू-कश्मीर में 10 साल बाद विधानसभा चुनाव हुए हैं.
एक आधिकारिक बयान में हरियाणा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) पंकज अग्रवाल ने कहा कि राज्य के 22 जिलों के 90 विधानसभा क्षेत्रों में 93 मतगणना केंद्र बनाए गए हैं. बादशाहपुर, गुरुग्राम और पटौदी विधानसभा सीटों के लिए दो-दो मतगणना केंद्र बनाए गए हैं, जबकि शेष 87 निर्वाचन क्षेत्रों के लिए एक-एक मतगणना केंद्र बनाया गया है. मतगणना प्रक्रिया की निगरानी के लिए इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया की ओर से 90 मतगणना पर्यवेक्षक भी नियुक्त किए गए हैं. सबसे पहले डाक मतपत्रों की गिनती की जाएगी, उसके 30 मिनट बाद इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की गिनती की जाएगी. सीईओ ने कहा कि मतगणना के प्रत्येक दौर की सटीक जानकारी समय पर अपलोड की जाएगी. मतगणना के दौरान उम्मीदवारों, उनके अधिकृत प्रतिनिधियों, रिटर्निंग ऑफिसर (आरओ/सहायक रिटर्निंग ऑफिसर (एआरओ) और ईसीआई पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में स्ट्रांगरूम खोले जाएंगे और वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी. उन्होंने कहा कि मतगणना केंद्रों के अंदर मोबाइल फोन ले जाने की अनुमति नहीं होगी.
अगर बात हरियाणा की करें तो यहां विधानसभा की 90 सीटें हैं. सूबे की इन सीटों पर 1031 उम्मीदवार चुनावी मैदान में थे, इसमें 930 पुरुष और 101 महिलाएं शामिल हैं. हरियाणा की सभी सीटों पर एक ही चरण में 5 अक्टूबर को वोट डाले गए थे. चुनाव आयोग की ओर से जारी अनंतिम आंकड़ों के मुताबिक 66.96 फीसदी से ज्यादा मतदाताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग किया. मतदान के लिए हरियाणा में 20 हजार 632 मतदान केंद्र बनाए गए थे, जिनमें से 13500 बूथ ग्रामीण और 7132 बूथ शहरी इलाकों में थे.
बीजेपी-कांग्रेस ने 89-89 सीटों पर लगाया दम हरियाणा चुनाव की बात करें तो आम आदमी पार्टी अकेले ही चुनाव मैदान में उतरी, जबकि कांग्रेस ने माकपा और बीजेपी ने गोपाल कांडा की हरियाणा लोकहित पार्टी के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ा. कांग्रेस ने नामांकन के अंतिम पलों में भिवानी सीट माकपा के लिए छोड़ दी थी. बीजेपी ने भी हलोपा के लिए एक ही सीट छोड़ी है, कांडा की सीट. दुष्यंत चौटाला की जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) का एडवोकेट चंद्रशेखर की आजाद समाज पार्टी (एएसपी) के साथ गठबंधन है. जेजेपी ने 70, एएसपी ने 20 विधानसभा सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं. इंडियन नेशनल लोक दल (आईएनएलडी) मायावती की अगुवाई वाली बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ रही है. इस गठबंधन से आईएनएलडी ने 53, बसपा ने 37 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं.
पिछला नतीजा क्या रहा था?
साल 2019 के पिछले विधानसभा चुनाव नतीजों की बात करें तो बीजेपी 36.5 फीसदी वोट शेयर के साथ 40 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी. कांग्रेस 28.1 फीसदी वोट शेयर के साथ 31 सीटें जीतकर दूसरे नंबर पर रही थी. तीसरे नंबर की पार्टी रही जेजेपी ने 14.8 फीसदी वोट शेयर के साथ 10 सीटें जीती थीं. आईएनएलडी 2.1 फीसदी वोट शेयर के साथ एक और अन्य 18.2 फीसदी वोट शेयर के साथ 8 सीटें जीतने में सफल रही थीं.

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