
हमास से जंग के बीच नेतन्याहू का फैसला, गाजा के पास करने जा रहे ये काम
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इजरायल के पीएम नेतन्याहू ओफिर समुदाय के लिए यह गांव बसा रहे हैं. शार हनेगेव क्षेत्रीय परिषद के प्रमुख ओफिर लिबस्टिन के सम्मान में इस गांव को बसाया जा रहा है. ओफिर उस समय मारे गए थे, जब वह हमास के लड़ाकों को नेस्तनाबूद करने के लिए निकले थे.
इजरायल और हमास की कट्टर दुश्मनी किसी से छिपी नहीं है. सात अक्टूबर को इजरायल पर हमास के हमले के बाद से शुरू हुई यह जंग हजारों जिंदगियां लील चुकी हैं. इजरायल के हमलों से गाजा पट्टी तबाह हो चुकी है. इस बीच प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गाजा के बेहद नजदीक एक नए गांव की आधारशिला रखी है.
पीएम नेतन्याहू 'ओफिर' समुदाय के लिए यह गांव बसा रहे हैं. शार हनेगेव क्षेत्रीय परिषद के प्रमुख ओफिर लिबस्टिन के सम्मान में इस गांव को बसाया जा रहा है. बता दें कि ओफिर को सात अक्टूबर को हमास के हमले में मार गिराया गया था.
इस दौरान कंस्ट्रक्शन और हाउसिंग मंत्री यितजक गोल्डनूफ और गाजा पट्टी के आसपास के इलाकों की स्थानीय परिषद के प्रमुख भी मौजूद थे. उन्होंने ओफिर लिबस्टिन के साहस की सराहना करते हुए कहा कि अपने बेटे नित्जान के साथ मिलकर ओफिर ने सात अक्टूबर को किबुत्ज में हमास के लड़ाकों का डटकर सामना किया था.
नेतन्याहू ने कहा कि आप सभी ने काफी मुश्किल समय देखा है. आपके दोस्तों का कत्लेआम हुआ. नेताओं को मार डाला गया. इस जंग में मर्द और औरतें लड़ीं. सात अक्टूबर को जो हुआ, उसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी. इजरायल के लोगों ने अब मोर्चा संभाल लिया है. हम हत्यारों को मिटा देंगे. हमने एक स्टेट, एक सेना, समुदायों और शहर बनाए हैं. हमने इमिग्रेंट्स को खुले दिल से स्वीकार किया है लेकिन फिर भी 100 सालों से यह जंग बदस्तूर जारी है.
उन्होंने कहा कि हमने कुछ महीने पहले एक नए समुदाय का गठन करने का फैसला किया था और उसे हनून नाम दिया था लेकिन आज हम इसका नाम बदलकर ओफिर कर रहे हैं. हमारे जाबांज ओफिर लिबस्टिन के नाम पर यह नाम दिया जा रहा है. यहां बच्चे उनकी बहादुरी और बलिदान के बारे में पढ़कर बड़े होंगे.
मरने वालों का आंकड़ा 16 हजार के पार

वॉशिंगटन में शांति परिषद की पहली बैठक में गाजा पट्टी की वर्तमान स्थिति और क्षेत्रीय स्थिरता पर गहन चर्चा हुई. बैठक में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका को मजबूत करने पर जोर दिया गया और निर्णय लिया गया कि गाजा में शांति बनाए रखने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल तैनात किया जाएगा. इस बल में इंडोनेशिया, मोरक्को, कजाकिस्तान, कोसोवो और अल्बानिया जैसे पांच देश अपने सैनिक भेजेंगे. देखें वीडियो.

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