
'हज हाउस का निर्माण एक धर्मनिरपेक्ष गतिविधि', हिंदुत्व समर्थक नेता को बॉम्बे हाईकोर्ट की दो टूक
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बॉम्बे हाई कोर्ट ने एख मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि हज हाउस का निर्माण करना एक धर्मनिरपेक्ष गतिविधि है. दो जजों की पीठ ने याचिकाकर्ता को कहा कि आपको धार्मिक गतिविधि में सरकार की संलिप्तता और धर्मनिरपेक्ष गतिविधि के बीच अंतर करना चाहिए.
बॉम्बे हाई कोर्ट ने गुरुवार को समस्त हिंदू अघाड़ी के हिंदुत्व समर्थक नेता मिलिंद एकबोटे को धार्मिक और धर्मनिरपेक्ष गतिविधि के बीच अंतर करने को कहा. मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति आरिफ डॉक्टर की पीठ ने कहा, 'आपको धार्मिक गतिविधि में सरकार की संलिप्तता और धर्मनिरपेक्ष गतिविधि के बीच अंतर करना चाहिए. हज हाउस का निर्माण एक धर्मनिरपेक्ष गतिविधि है. यह कोई धार्मिक गतिविधि नहीं है. खुद को भ्रमित न करें.'
याचिकाकर्ता की दलील
एकबोटे ने एक रिट याचिका दायर की थी जिसमें उन्होंने मांग की थी कि पुणे में एक निर्माणाधीन हज हाउस को ध्वस्त कर दिया जाए. पीठ ने इस रिट याचिका को जनहित याचिका (पीआईएल) में बदल दिया क्योंकि इसमें एकबोटे का कोई व्यक्तिगत हित नहीं था. अदालत ने पुणे नगर निगम को एकबोटे की याचिका पर जवाब दाखिल करने का भी निर्देश दिया है और उनके वकील को केवल भूमि उपयोग के निर्माण के लिए कथित "भूमि उपयोग में परिवर्तन" तक ही अपने तर्क को सीमित रखने के लिए कहा है.
पुणे नगर निगम ने कही ये बात
गुरुवार को सुनवाई के दौरान, एकबोटे के वकील कपिल राठौड़ ने दावा किया कि विशेष भूमि पुणे के कोंडवा क्षेत्र और उसके आसपास के लोगों को बुनियादी सुविधाएं प्रदान करने के लिए आरक्षित थी. उन्होंने कहा कि हज हाउस के निर्माण के लिए भूमि का उपयोग बदल दिया गया है. पुणे नगर निगम की ओर से पेश वकील अभिजीत कुलकर्णी ने कहा कि जमीन का उपयोग नहीं बदला गया है. उन्होंने कहा कि विभिन्न समुदायों को अपनी सांस्कृतिक और सामुदायिक गतिविधियों के लिए जगह मिलती है. उन्होंने बताया कि, इमारत की दो मंजिलों का निर्माण पहले ही किया जा चुका है. इस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने उनसे जवाब में हलफनामा दाखिल करने को कहा.
राठौड़ ने दिया ये तर्क

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