
'सुनिए, अगर आप भारत के PM हैं', रूस से क्रूड ऑयल की खरीद पर धमकी पर आ गए NATO चीफ, कहा- पुतिन को फोन लगाइए...
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राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने बयान में ब्राजील, चीन या भारत का नाम नहीं लिया था. लेकिन मार्क रूट ने तस्वीर साफ कर दी है. बता दें कि ये तीन देश हैं जिन्होंने 2022 में पुतिन की सेना द्वारा यूक्रेन पर आक्रमण के बाद से रूसी तेल और पेट्रोलियम उत्पाद खरीदना जारी रखा है.
"सुनिए.. अगर आप चीन के राष्ट्रपति हैं, या फिर भारत के प्रधानमंत्री हैं या फिर ब्राजील के राष्ट्रपति हैं और आप अभी भी रूसियों के साथ बिजनेस कर रहे हैं और उनका तेल और गैस खरीद रहे हैं, तो आप समझ लीजिए कि अगर मॉस्को में बैठा वो आदमी शांति वार्ता को गंभीरता से नहीं ले रहा है तो मैं 100 परसेंट का सेकेंडरी सैंक्शंस लगाने जा रहा हूं."
धमकी की ये भाषा दुनिया के शक्तिशाली देशों के संगठन नाटो चीफ मार्क रूट की है. उन्होंने गैर कूटनीतिक शब्दावली का इस्तेमाल करते हुए भारत-ब्राजील और चीन को रूस के साथ बिजनेस न करने की सलाह दी है. नाटो महासचिव मार्क रूट ने मंगलवार को चेतावनी दी कि यदि ब्राजील, चीन और भारत जैसे देश रूस के साथ व्यापार करना जारी रखते हैं तो उन पर सेकेंडरी सैंक्शंस बहुत भारी पड़ सकते हैं. ये सैंक्शंस अमेरिका द्वारा इन देशों पर लगाया जा सकता है.
उन्होंने बुधवार को अमेरिकी सीनेटरों के साथ बैठक के दौरान यह बात कही. यह बात राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा यूक्रेन के लिए नए हथियारों की घोषणा और रूस से सामान खरीदने वाले देशों पर कठोर टैरिफ लगाने की धमकी देने के ठीक एक दिन बाद कही गई.
मार्क रूट ने कहा है कि इन देशों को चाहिए कि वे पुतिन पर यूक्रेन के साथ सीजफायर के लिए दबाव बनाएं.
रूट ने कहा, "इन तीनों देशों के लिए मेरा विशेष प्रोत्साहन यह है कि अगर आप बीजिंग या दिल्ली में रहते हैं, या ब्राज़ील के राष्ट्रपति हैं, तो आपको इस पर गौर करना चाहिए, क्योंकि यह आपको बहुत प्रभावित कर सकता है." उन्होंने आगे कहा, "तो कृपया व्लादिमीर पुतिन को फोन करें और उन्हें बताएं कि उन्हें शांति वार्ता के बारे में गंभीर होना होगा, क्योंकि अन्यथा इसका ब्राज़ील, भारत और चीन पर व्यापक रूप से प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा."
गौरतलब है कि ट्रंप रूस के खिलाफ यूक्रेन को हथियारों की नई खेप देने का ऐलान कर चुके हैं. ट्रंप ने यह भी धमकी दी है कि अगर रूस 50 दिनों के अंदर शांति समझौते पर सहमत नहीं होता है तो रूस का तेल खरीदने वाले देशों पर अमेरिका 100 फीसदी सेकेंडरी टैरिफ लगाएगा.

लेकिन अब ये कहानी उल्टी घूमने लगी है और हो ये रहा है कि अमेरिका और चीन जैसे देशों ने अमेरिका से जो US BONDS खरीदे थे, उन्हें इन देशों ने बेचना शुरू कर दिया है और इन्हें बेचकर भारत और चाइना को जो पैसा मिल रहा है, उससे वो सोना खरीद रहे हैं और क्योंकि दुनिया के अलग अलग केंद्रीय बैंकों द्वारा बड़ी मात्रा में सोना खरीदा जा रहा है इसलिए सोने की कीमतों में जबरदस्त वृद्धि हो रही हैं.

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