
सिद्धारमैया बनेंगे अमरिंदर या गहलोत की तरह बचा ले जाएंगे कुर्सी? शिवकुमार से चुनौती
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कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर कांग्रेस में अंदरूनी लड़ाई तेज हो गई है, जहां डीके शिवकुमार खुलकर ढाई-ढाई साल के कथित सत्ता-साझेदारी फॉर्मूले को लागू करने की मांग कर रहे हैं. सिद्धारमैया का ढाई साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद शिवकुमार दिल्ली में गांधी परिवार से मिलकर अपनी बात रखना चाहते हैं.
कर्नाटक में मुख्यमंत्री की कुर्सी पर काबिज होने की लड़ाई कांग्रेस में तेज हो गई है. डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार अब खुलकर मैदान में उतर गए हैं और उस फॉर्मूले की याद दिला रहे हैं, जिसके तहत ढाई साल पहले सिद्धारमैया मुख्यमंत्री बने थे. सिद्धारमैया ने फैसला कांग्रेस हाईकमान के ऊपर छोड़ रखा है, तो डीके शिवकुमार के सब्र का बांध टूट रहा है.
डीके शिवकुमार के समर्थक विधायकों ने तीन चरणों में दिल्ली आकर कांग्रेस नेतृत्व से मुलाकात कर सीएम के बदलाव करने की बात रखी. अब खुद डीके शिवकुमार गांधी परिवार से मिलकर अपनी बात रखना चाहते हैं. राहुल गांधी से मिलने का टाइम नहीं मिला तो डीके शिवकुमार ने सोनिया गांधी से मुलाकात का वक्त मांगा है.
कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया के बीच आरपार की लड़ाई छिड़ गई है. सिद्धारमैया पांच साल का कार्यकाल पूरा करने का दम भर रहे हैं, तो शिवकुमार ढाई-ढाई साल वाले फॉर्मूले की याद दिला रहे हैं. ऐसे में देखना होगा कि सिद्धारमैया पंजाब के सीएम रहे कैप्टन अमरिंदर की तरह बीच में कुर्सी छोड़ते हैं या फिर अशोक गहलोत की तरह अपनी कुर्सी बचाए रख पाते हैं?
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कर्नाटक में कांग्रेस सीएम पद को लेकर लंबे समय से अंतर्कलह से जूझ रही है. मौजूदा सीएम सिद्दारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के बीच सियासी टकराव खुलकर सामने आ गई है. शिवकुमार के समर्थक विधायकों ने दिल्ली में कांग्रेस आलाकमान से मुलाकात कर मुख्यमंत्री पद रोटेशन के लिए 2023 के 'सत्ता-साझाकरण' वादे को लागू का दबाव बनाया. इस बैकग्राउंड में मंगलवार को डीके शिवकुमार और सतीष जरकीहोली के बीच बैठक हुई, जिसका मुख्य केंद्र दोनों के बीच मतभेदों को सुलझाना था.
सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार अपना ढाई साल का कार्यकाल 20 नवंबर को पूरा कर चुकी है. अब डीके शिवकुमार के समर्थक और विधायक अब मुख्यमंत्री को बदलने की मांग कर रहे हैं. इसके लिए 18 मई 2023 के उस कथित समझौते की याद दिलाई जा रही है, जिसमें ढाई-ढाई साल के मुख्यमंत्री बनने का फार्मूले पर समझौता हुआ था. डीके शिवकुमार इसी समझौते के तहत सीएम बनने के लिए खुलकर उतर गए हैं. पावर शेयरिंग के ढाई-ढाई साल वाले फॉर्मूले को आधार बनाकर डीके शिवकुमार दिल्ली आ रहे हैं ताकि शीर्ष नेतृत्व के सामने अपनी बात रख सकें.

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