
समाजवादी पार्टी के धक्के के बावजूद क्या उद्धव सेना हिंदुत्व में घर वापसी कर पाएगी? | Opinion
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उद्धव ठाकरे के लिए समाजवादी पार्टी की चुनौती उतनी बड़ी नहीं है, जितनी हिंदुत्व की राजनीति में घर वापसी. अगर वो हिंदुत्व के एजेंडे पर लौटने का फैसला करते हैं, तो भी उनको पहले के मुकाबले ज्यादा आक्रामक रुख दिखाना होगा.
उद्धव ठाकरे कट्टर हिंदुत्व की राजनीति तो बहुत पहले ही छोड़ चुके थे, लेकिन निशाने पर आये कांग्रेस और एनसीपी से हाथ मिलाने के बाद. शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे से कमान अपने हाथ में लेने के बाद उद्धव ठाकरे ने पार्टी की छवि बदलनी शुरू कर दी थी, और काफी हद तक कामयाब रहे - लेकिन बवाल शुरू हुआ बीजेपी का साथ छोड़ने के बाद.
बीजेपी के साथ रहते हुए भी उद्धव ठाकरे की शिवसेना में वो तेवर देखने को नहीं मिलता था, जो बाल ठाकरे के जमाने में हुआ करता था. बल्कि, राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के कार्यकर्ता बाल ठाकरे वाले पुराने अंदाज में देखे जाते थे.
कांग्रेस और एनसीपी से हाथ मिलाने के बाद उद्धव ठाकरे दो कदम और आगे पहुंच गये. ये तस्वीर तब और भी साफ नजर आई जब वो एक मुस्लिम मोहल्ले में लोगों से बेहद अफसोस वाले भाव में बोले कि मिलने में काफी देर हो गई - और ये सब उनके खिलाफ चला गया.
बीजेपी ने उद्धव ठाकरे के हिंदुत्व पर जोरदार हमला बोल दिया. और, लगताार सवाल उठाना शुरू कर दिया. राज ठाकरे भी बीजेपी के सुर में सुर मिलाकर मुहिम चलाने लगे - और हालात ऐसे हो गये कि एक दिन एकनाथ शिंदे ने ऐसी बगावत की कि सब कुछ तहस नहस कर दिया.
2024 के लोकसभा चुनावों से उद्धव ठाकरे और उनके पास बचे हुए समर्थकों में एक उम्मीद लौटी थी, लेकिन महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजों ने सारी ही उम्मीदों पर पानी फेर दिया है - और अब तो INDIA ब्लॉक में भी विरोध शुरू हो गया है.
अब तो सवाल ये उठ रहा है कि अगर उद्धव ठाकरे हिंदुत्व की तरफ वापसी का रुख करें भी, तो क्या घर वापसी मुमकिन हो पाएगी?

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