
सपा को कांग्रेस की कौन सी बात इतनी बुरी लग गई कि सारे एहसान गिनाने लगी?
AajTak
समाजवादी पार्टी और कांग्रेस की तल्खी कम होती नजर नहीं आ रही. सपा ने अब 2009 के चुनाव परिणाम से लेकर दो सीटों तक, कांग्रेस पर समाजवादी एहसान गिना दिए हैं. आखिर सपा को कांग्रेस की कौन सी बात इतनी बुरी लग गई?
लोकसभा चुनाव करीब हैं. राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ समेत पांच राज्यों में चुनावी शोर अब ढलान की ओर है लेकिन नहीं थम रही तो लोकसभा सीटों के लिहाज से सबसे बड़े सूबे में दो विपक्षी दलों समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस के बीच की तल्खी. अब सपा के राष्ट्रीय सचिव और प्रवक्ता राजीव राय ने एक्स (पहले ट्विटर) पर पोस्ट कर कांग्रेस को आड़ेहाथों लिया है.
राजीव राय ने एक्स पोस्ट में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को मेंशन करते हुए कहा है कि क्या आपके प्रवक्ता को इतना भी नहीं पता कि समाजवादी थाली में छेद नहीं करते. उन्होंने आगे कहा कि समाजवादी तो बीजेपी को रोकने के लिए अपनी थाली से भी खाना निकाल कर कांग्रेस को कई बार दिए हैं. राजीव राय ने लगे हाथ 2009 में यूपीए सरकार के समर्थन से लेकर 2017 के चुनाव में गठबंधन के दौरान 106 सीटें देने तक के वाकये का जिक्र किया है.
उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं होता तो 2009 में ही आपकी सरकार गिर गई होती. 2017 में 106 सीटें देने का खामियाजा हम झेले. राजीव राय अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में कांग्रेस पर सपा के एहसान गिना गए तो साथ ही तंज भी किया. उन्होंने कहा कि आपके नेताओं को पता होना चाहिए कि यूपी में तो कांग्रेस भूखमरी की कगार पर है. अगर हम आपकी थाली में दाना ना डालें तो दो भी नहीं बचेगा फिर इतना अहंकार किस बात का? इसलिए आप उन्हें हकीकत से रुबरू होकर I.N.D.I.A. गठबंधन की मजबूती के लिए काम करने को कहें.
सपा सचिव के पोस्ट से छिड़ा ट्विटर वॉर
सपा सचिव ने साथ ही ये भी याद दिलाया है कि दिल्ली का रास्ता यूपी से ही मिलेगा. राजीव राय के इस पोस्ट के बाद अब सपा और कांग्रेस के नेताओं में ट्विटर वॉर छिड़ गया है. राजीव राय के एक्स पोस्ट पर यूथ कांग्रेस यूपी ईस्ट के प्रवक्ता धर्मेंद्र कुमार ने पलटवार करते हुए कहा है कि ज्ञान तो आप कांग्रेस को दे रहे हैं लेकिन आपका अहंकार तो खुद ही गठबंधन की जड़ खोदने में लगा है. उन्होंने 2009 में कांग्रेस के अकेले 21 सीटें जीतने का जिक्र करते हुए कहा कि आज आप भी पांच पर ही हैं.
ये भी पढ़ें- क्या MP में सपा-कांग्रेस की खींचतान INDIA गठबंधन में टूट की शुरुआत है? अखिलेश के गुस्से के पीछे की कहानी

आज जब वक्त इतना कीमती हो गया है कि लोग हरेक चीज की दस मिनट में डिलीवरी चाहते हैं. वहीं दूसरी तरफ विडंबना ये है कि भारत का एक शहर ऐसा है जहां इंसान को कहीं जाने के लिए सड़कों पर ट्रैफिक में फंसना पड़ता है. यहां हर साल औसतन 168 घंटे लोग ट्रैफिक में फंसे रहते हैं. यानी पूरे एक हफ्ते का समय सिर्फ ट्रैफिक में चला जाता है.

जिस शहर की फायरब्रिगेड के पास छोटे से तालाब के पानी से एक शख्स को निकालने के लिए टूल नहीं है, वह किसी बड़े हादसे से कैसे निबटेगा. युवराज मेहता की मौत ने नोएडा की आपदा राहत तैयारियां की कलई खोल दी है. सवाल यह है कि जब नोएडा जैसे यूपी के सबसे समृद्ध शहर में ये हालात हैं तो बाकी शहर-कस्बों की स्थिति कितनी खतरनाक होगी.

दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता में सुधार के कारण कमीशन ऑफ एयर क्वालिटी इंप्रवूमेंट (CAQM) ने GRAP-3 पाबंदियां हटा दी हैं. AQI में सुधार के चलते अब कंस्ट्रक्शन और आवाजाही पर लगी पाबंदियों में राहत मिली है. IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में AQI 'एवरेज' से 'खराब' श्रेणी में रह सकता है, जिसके कारण GRAP-3 के तहत गंभीर पाबंदियां लागू नहीं की जाएंगी.

AIMIM प्रवक्ता वारिस पठान ने स्पष्ट किया है कि मुसलमानों ने अब फैसला कर लिया है कि वे अब किसी भी ऐसे व्यक्ति को समर्थन नहीं देंगे जो केवल जातीय विभाजन करता है, बल्कि वे उस नेता के साथ जाएंगे जो विकास की बात करता है. उनका यह बयान समाज में सकारात्मक बदलाव और विकास को प्राथमिकता देने की दिशा में है. मुसलमान अब ऐसे नेताओं के साथ खड़े होंगे जो उनकी बेहतरी और समाज के समग्र विकास के लिए काम करें.









