
सत्येंद्र जैन को भ्रष्टाचार केस में CBI की क्लीनचिट केजरीवाल के लिए कितनी बड़ी राहत है?
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सत्येंद्र जैन के खिलाफ भ्रष्टाचार केस में CBI की क्लोजर रिपोर्ट, असल में, अरविंद केजरीवाल के लिए बड़ी राजनीतिक राहत है. सात साल चली जांच के बाद सीबीआई ने कहा कि उसके पास जैन के खिलाफ सबूत नहीं हैं. हालांकि, उन पर और भी केस लंबित है, जिन पर न्यायिक कार्यवाही चलती रहेगी.
सत्येंद्र जैन को भ्रष्टाचार के एक केस में मिली राहत, अरविंद केजरीवाल के लिए आज की तारीख में बहुत बड़ा सहारा है. ऐसे मामले अभी और भी हैं, लेकिन सत्येंद्र जैन के खिलाफ सीबीआई को कोई सबूत नहीं मिल पाना, अरविंद केजरीवाल के उस दावे पर अदालत की मुहर है, जिसमें वो कहते हैं कि फर्जी मामलों में उनको और उनके साथियों के जेल भेजा गया. हालांकि, सत्येंद्र जैन पर भ्रष्टाचार, मनी लांड्रिंग और आय से अधिक संपत्ति के कई केस अब भी लंबित हैं, जिन पर न्यायिक कार्यवाही चलती रहेगी.
जहां तक राजनीति की बात है, तो सत्येंद्र जैन के बहाने आम आदमी पार्टी के अन्य नेताओं को अपनी बेगुनाही को लेकर दलील देने का मौका मिल गया है. सत्येंद्र जैन के साथ भ्रष्टाचार के आरोप में ही (दिल्ली शराब नीति केस) अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और संजय सिंह तक को जेल में लंबा वक्त गुजारना पड़ा है. दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट ने सत्येंद्र जैन और पीडब्ल्यूडी के कुछ अफसरों के खिलाफ सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को मंजूरी दी है, जिसमें सीबीआई ने कहा कि उनके पास सत्येंद्र जैन के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं हैं.
दिल्ली सरकार के सतर्कता निदेशालय की शिकायत पर सत्येंद्र जैन और लोक निर्माण विभाग कुछ अधिकारियों के खिलाफ शिकायत की गई थी. दिल्ली सरकार के विजलेंस डिपार्टमेंट ने मई, 2019 में FIR दर्ज की थी, और उसके बाद CBI ने केस की जांच शुरू की थी.
आरोप था कि सत्येंद्र जैन और उनके विभाग के अफसरों ने भर्ती और वित्तीय नियमों को नजरअंदाज रते हुए सलाहकारों की एक क्रिएटिव टीम नियुक्त कर डाली थी. सात साल चली जांच के बावजूद सीबीआई को कोई आपराधिक मामला, निजी फायदा या रिश्वतखोरी के सुबूत नहीं मिले.
जिस पर स्पेशल जज दिग विनय सिंह ने स्पष्ट रूप से कहा है कि सिर्फ शक के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता. कहते हैं, अगर किसी पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (POC Act) के तहत एक्शन होना है, तो ठोक सबूत होना जरूरी है… महज कर्तव्य में लापरवाही बताकर किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो सकती, ये न्यायसंगत नहीं माना जा सकता.
एक क्लोजर रिपोर्ट ने बोलने का मौका दे दिया

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