
सकट चौथ आज... कैसे कुपोषण के खिलाफ एक अभियान बन जाता है गणेशजी का ये व्रत
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सकट चौथ व्रत गणेशजी के बाल स्वरूप की पूजा के माध्यम से बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य को बेहतर बनाने का एक प्राचीन तरीका है. यह व्रत खासकर कुपोषण जैसी गंभीर समस्या से लड़ने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है. भारत में 5 साल से कम उम्र के कई बच्चे कुपोषण से प्रभावित हैं, जो उनके विकास और देश के भविष्य के लिए खतरा है.
पुराणों में गणेशजी को माता पार्वती का बेटा बताया गया है. कहानियों के आधार पर उनकी इमेज भी कुछ ऐसी बनती है जैसे किसी मां की गोद में एक सुंदर, गोल-मटोल और स्वस्थ बच्चा बैठा हो. देशभर के कई मंदिरों में जहां गणेश जी की पूजा गौरी पुत्र गणेश या संपूर्णानंद (गणेशजी का ही एक नाम) के रूप में होती है, वहां गणपति की स्थापना माता पार्वती की गोद में ही की जाती है या फिर उनके बगल में बिल्कुल नन्हें बालक के तौर पर दिखाया जाता है.
स्वस्थ बचपन की सटीक इमेज हैं श्रीगणेश इसी तरह श्रीकृष्ण के बालस्वरूप की इमेज भी कुछ ऐसी ही है. वह सुंदर छवि के साथ माता यशोदा की गोद में बैठे, झूला झूलते और हंसते-खिलखिलाते नजर आते हैं. संतान की इच्छा रखने वाले दंपती भी गणेशजी या श्रीकृष्ण के बालस्वरूप की ही पूजा करते हैं. क्योंकि एक स्वस्थ बच्चा या संतान कैसी होनी चाहिए तो श्रीगणेश और श्रीकृष्ण की बाल छवि उस इमेज के लिए बिल्कुल सटीक बैठती है. आप किसी तंदरुस्त बच्चे के बारे में सोचें तो ऐसी ही इमेज बनेगी, जो थोड़ा गोल-मटोल हो, हंसमुख सा हो, शरारतें भी करता हो, जिसकी बातें मनमोहक हों और उसमें कुछ चतुराई भी हो.
देशभर की पूजा पद्धति में गणपति प्रथम पूज्य हैं और उनकी पूजा के लिए चतुर्थी तिथि का दिन माना जाता है. इसलिए साल भर हर महीने आने वाली चतुर्थी तिथि को विनायकी और संकष्ठी चतुर्थी कहा जाता है. इसमें भी माघ महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी बड़ी संकष्ठी (जो आज है) कहलाती है, जिसे उत्तर भारतीयों की आम बोलचाल में सकट चौथ कहा जाता है.
कैसे बच्चों के संकट को दूर करने वाली पूजा बन जाती है संकष्ठी महिलाओं द्वारा गणेशजी की पूजा का ये दिन सिर्फ संकट दूर करने के कारण संकष्ठी नहीं कहलाता है, बल्कि असल में ये दिन उनके बच्चों के ऊपर आने वाले खास संकटों को दूर करने का उपाय बन जाता है. ये संकट है कुपोषण का, स्वास्थ्य का. और जब ये संकट बड़ा बन जाता है तो गणपति इस संकट को दूर करने और कुपोषण के खिलाफ अभियान में सबसे प्राचीन ब्रांड एंबेसडर की भूमिका में सामने आते हैं.
सकट चौथ की पूजा, इसकी व्रत विधि और महिलाओं के इसे करने के तरीके को ठीक से समझें तो इस पूजा का अर्थ समझ में आता है. माघ का महीना सर्दी का होता है. ठंडक को देखते हुए ऐसे प्रसाद बनाए और खाए जाते हैं जिनकी तासीर गर्म होती है. तिल, गुड़, घी इसके अच्छे सोर्स हैं. पोषण के लिए जरूरी है ऊर्जा. उत्तर भारत में कई स्थानों पर ऐसे फल और कंद सकट चौथ की पूजा में चढ़ाए जाते हैं जो कि देखने में श्रीगणेश की ही आकृति जैसे लगते हैं.
इनमें शकरकंद, सुथनी और गाजर फलों के प्रसाद के रूप में चढ़ाए जाते हैं. शकरकंद कार्बोहाइड्रेट का सोर्स है. सुथनी में मिनरल्स पाए जाते हैं. गाजर विटामिन A का सोर्स है. अमरूद गोल-मटोल पेट जैसी आकृति का है, साथ ही विटामिन C और मिनरल्स से भरपूर है. तिल की तासीर गर्म होती है. गुड़ ऊर्जा देता है और घी Good Fat है, जिसके कोई साइड इफेक्ट नहीं है. व्रत के पीछे की कामना है कि सारे बच्चे इसी तरह पोषित हों और बचपन मजबूत बने. उन्हें कुपोषण का रोग न लगे. किसी समाज के बच्चे अगर स्वस्थ होंगे तो वह अपने आप मजबूत बनेगा.

Aaj 17 March 2026 का पंचांग (Aaj ka Panchang): 17 मार्च 2026, दिन- मंगलवार, चैत्र मास, कृष्ण पक्ष, त्रयोदशी तिथि सुबह 09.23 बजे तक फिर चतुर्दशी तिथि, शतभिषा नक्षत्र, चंद्रमा- कुंभ में, सूर्य- मीन में, अभिजित मुहूर्त- दोपहर 12.06 बजे से दोपहर 12.54 बजे तक, राहुकाल- दोपहर 3.30 बजे से शाम 5 बजे तक, दिशा शूल- उत्तर.












