
शहबाज शरीफ समय से पहले पाकिस्तानी संसद को भंग करने पर क्यों अड़े? उठ रहे ये सवाल
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पिछले साल अप्रैल महीने में प्रधानमंत्री पद से इमरान खान की रुखस्ती के बाद 342 सदस्यीय नेशनल असेंबली में विपक्ष को 174 सदस्यों का समर्थन मिला था. संयुक्त विपक्ष के नेता शहबाज शरीफ पाकिस्तान के नए प्रधानमंत्री बनाए गए थे. लेकिन पाकिस्तान मुस्लिम लीग-एन (पीएमएल-एन) पार्टी के नेता शहबाज शरीफ के साथ कई और पार्टियां भी थी, जिन्होंने इमरान को सत्ता से बेदखल करने के लिए मोर्चा खोला था.
एक मशहूर कहावत है कि मोहब्बत और जंग में सब जायज है. अगर यह जंग सियासत की हो तो कोई नियम-कायदे यहां लागू नहीं होते. ऐसे ही हालात लगभग एक साल से पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के है. कर्जे की मार, गरीबी, भुखमरी, महंगाई, बेरोजगारी से लेकर सियासी उथल-पुथल तक इस एक साल में पाकिस्तान उस बुरे दौर से गुजर रहा है, जहां उसे मदद की दरकार है. लेकिन ऐसे में राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अगुवाई में गठबंधन सरकार ने नेशनल असेंबली भंग करने पर सहमति जताई है. और जल्द ही राष्ट्रपति के समक्ष संसद भंग करने की सिफारिश की जाएगी. इसका सीधा-सीधा मतलब है कि मौजूदा सरकार अपना कार्यकाल समाप्त होने से पहले ही कार्यवाहक सरकार को सत्ता सौंप रही है.
लेकिन गठबंधन सरकार के इस फैसले के बाद एक साथ कई सवाल उठ खड़े हुए हैं. पहला सवाल कि जब मौजूदा सरकार का कार्यकाल 12 अगस्त को समाप्त हो रहा है तो ऐसे में इससे ठीक चार दिन पहले आठ अगस्त को सरकार संसद भंग क्यों कर रही है? दूसरा सवाल ये कि नेशनल असेंबली भंग करने से सरकार को क्या फायदा होगा? एक सवाल ये भी है कि नेशनल असेंबली भंग होने की स्थिति में सरकार आखिर सत्ता का हस्तांतरण किसे करेगी? इन सवालों के जवाब जानने के लिए हमें इस फैसले की मंशा जाननी होगी.
संसद भंग करने का फैसला अकेला शहबाज का नहीं
पिछले साल अप्रैल महीने में प्रधानमंत्री पद से इमरान खान की रुखसती के बाद 342 सदस्यीय नेशनल असेंबली में विपक्ष को 174 सदस्यों का समर्थन मिला था. संयुक्त विपक्ष के नेता शहबाज शरीफ पाकिस्तान के नए प्रधानमंत्री बनाए गए थे. लेकिन पाकिस्तान मुस्लिम लीग-एन (पीएमएल-एन) पार्टी के नेता शहबाज शरीफ के साथ कई और पार्टियां भी थी, जिन्होंने इमरान को सत्ता से बेदखल करने के लिए मोर्चा खोला था. इस संयुक्त गठबंधन में पीएमएल-एन के साथ पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी), मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट पाकिस्तान (एमक्यूएम-पाकिस्तान), जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (जेयूआई-एफ), पीएमएल-क्यू और कई छोटी-मोटी पार्टियां शामिल हैं.
ऐसे में अब ये जान लेना चाहिए कि आठ अगस्त को नेशनल असेंबली भंग करने का फैसला अकेला प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ या उनकी पार्ट पीएमएल-एन का नहीं है बल्कि सरकार के गठबंधन साझेदारों की आपसी सहमति के बाद यह फैसला लिया गया है.
पाकिस्तानी संसद भंग करने की जिद पर क्यों अड़ी है सरकार?

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