
शहबाज शरीफ की पीएम मोदी से अपील को लेकर अमेरिका ने दी प्रतिक्रिया
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अमेरिका ने कहा है कि वह दक्षिण एशिया क्षेत्र में शांति की कामना करता है. हालांकि, उसका कहना है कि द्विपक्षीय वार्ता दोनों देशों के बीच का आपसी मामला है. अमेरिका ने पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों को लेकर भी बात की है और कहा है कि अमेरिका पाकिस्तान की सरकारों को उनके द्वारा अपनाई जाने वाली नीतियों के आधार पर आंकता है.
भारत-पाकिस्तान के संबंधों पर सारी दुनिया की नजरें रहती हैं. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की ओर से भारत से बातचीत की अपील के एक हफ्ते बाद अमेरिका ने इस पर टिप्पणी की है. अमेरिका ने कहा है कि वह दक्षिण एशिया में शांति का समर्थन करता है. अमेरिकी विदेश मंत्रालय का कहना है कि भारत और पाकिस्तान के बीच किसी भी तरह की बातचीत दोनों देशों का आपसी मामला है.
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस ने सोमवार को वाशिंगटन में एक प्रेस ब्रीफिंग में कहा, 'हम लंबे समय से दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय स्थिरता की मांग करते रहे हैं. लेकिन भारत और पाकिस्तान के बीच किसी भी बातचीत की गुंजाइश, वार्ता में किसी तरह की प्रगति और वार्ता का स्वरूप दोनों देशों के बीच का मामला है.'
प्राइस ने कहा कि दोनों देश के बीच शांति क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बेहद अहम है और अमेरिकी लंबे समय से इलाके में शांति की मांग करता रहा है. प्राइस ने कहा, 'निश्चित रूप से हम क्षेत्र में स्थिरता देखना चाहते हैं.'
पाकिस्तान के साथ अमेरिका के संबंधों पर बोले प्राइस
पाकिस्तान और अमेरिका के रिश्तों में इमरान खान की सरकार के समय थोड़ी खटास आई थी. इमरान खान अमेरिका की अपेक्षा रूस के साथ अपने संबंधों को अधिक महत्व देने लगे थे. खान के खिलाफ जब पाकिस्तान में माहौल तैयार किया जा रहा था, तब वह अमेरिका पर लगातार हमले कर रहे थे. उनका आरोप था कि विपक्ष अमेरिका के साथ मिलकर उन्हें सत्ता से हटाना चाहता है. कुछ समय बाद इमरान खान पाकिस्तान की संसद में बहुमत साबित नहीं कर पाए और अपनी कुर्सी से हाथ धो बैठे.
शहबाज शरीफ के सत्ता में आने के बाद से दोनों देशों के रिश्ते पटरी पर आने शुरू हुए हैं. अमेरिका-पाकिस्तान के संबंधों पर भी नेड प्राइस से सवाल किया गया जिसके जवाब में उन्होंने कहा कि अमेरिका पाकिस्तान में किसी भी निर्वाचित सरकार से बातचीत के लिए तैयार है और उसके साथ काम करेगा.

वॉशिंगटन में शांति परिषद की पहली बैठक में गाजा पट्टी की वर्तमान स्थिति और क्षेत्रीय स्थिरता पर गहन चर्चा हुई. बैठक में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका को मजबूत करने पर जोर दिया गया और निर्णय लिया गया कि गाजा में शांति बनाए रखने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल तैनात किया जाएगा. इस बल में इंडोनेशिया, मोरक्को, कजाकिस्तान, कोसोवो और अल्बानिया जैसे पांच देश अपने सैनिक भेजेंगे. देखें वीडियो.

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