
वक्फ संशोधन बिल पर JPC की अगली बैठक 19 से 20 सितंबर को होगी, ईमेल से मिले 84 लाख सुझाव
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वक्फ संशोधन बिल को लेकर संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की अगली बैठक 19-20 सितंबर को होगी. बिल के संसोधन को लेकर JPC को करीब 84 लाख सुझाव मिले हैं. ये सुझाव ईमेल के जरिए भेजे गए थे. इसके अलावा 70 बॉक्स लिखित सुझाव मिले हैं
वक्फ संशोधन बिल को लेकर संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की अगली बैठक 19-20 सितंबर को होगी. बिल के संसोधन को लेकर JPC को करीब 84 लाख सुझाव मिले हैं. ये सुझाव ईमेल के जरिए भेजे गए थे. इसके अलावा 70 बॉक्स लिखित सुझाव मिले हैं. सजेशन की की समय सीमा आज रात को समाप्त हो जाएगी. समिति ने इसके लिए कोई क्यूआर कोड जारी नहीं किया है. 19 तारीख को पटना लॉ कॉलेज के चांसलर को बैठ में बुलाया गया है. कमेटी की अगली बैठक 26 से एक अक्टूबर को देश के अलग-अलग शहरों में होगी.
सूत्रों ने बताया है कि संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) देश के अलग-अलग शहरों में जाकर स्टेक होल्डर्स से सुझाव लेगी. इसके लिए जेपीसी मुंबई, हैदराबाद, चेन्नई, बैंगलुरु, अहमदाबाद समेत कई शहरों का दौरा करेगी. केंद्र सरकार ने वक्फ बोर्ड की शक्तियों को लेकर वक्फ संशोधन बिल संसद में पेश किया था. इसके बाद इसे संयुक्त संसदीय समिति के पास भेज दिया गया है.
वक्फ बिल का विरोध हुआ था लखनऊ में जुमे की नमाज के दौरान लोगों ने वक्फ बिल का विरोध किया था. मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने वक्फ की कमियों के बारे में जानकारी दी और खामियों को गिनाया था. नमाजियों ने क्यूआर कोड के जरिए विरोध दर्ज कराने की बात कही थी, लेकिन जेपीसी ने इसके लिए कोई क्यूआर कोड जारी नहीं किया है. लोगों का कहना है कि वक्फ बिल में कई खामियां हैं और इससे मुस्लिम समुदाय को नुकसान होगा. वे चाहते हैं कि सरकार इस बिल को वापस ले और मुस्लिम समुदाय की भावनाओं का सम्मान करे.
इस मुद्दे पर जेपीसी का कहना है कि उन्होंने कोई क्यूआर कोड जारी नहीं किया है और लोगों से सुझाव लेने के लिए देश के अलग-अलग शहरों में जाएंगे. जेपीसी वक्फ संशोधन बिल पर स्टेक होल्डर्स और विशेष लोगों से बात कर रही है और उनकी राय ले रही है. जेपीसी की चार बैठकें हो चुकी हैं और अब आम जनता से सुझाव मांगे गए हैं.
ऑल इंडिया कौमी तंजीम ने जेपीसी के सामने अपनी आपत्ति जताई है और कहा है कि विधेयक का मकसद वक्फ बोर्डों को कमजोर करना और मुस्लिम समुदाय के धार्मिक मामलों में दखल देना है. संगठन ने 20 बिंदुओं पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं और कहा है कि यह विधेयक वक्फ बोर्डों की क्षमताओं को कमजोर करेगा.

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