
लालच, धोखा और हैवानियत... जिंदगी के नाम पर मौत बांटने वाले 'डॉक्टर डेथ' की खौफनाक कहानी
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करीब छह साल तक चली जांच के बाद पुलिस ने इस मामले के आरोपी डॉक्टर समीर सर्राफ उर्फ डॉक्टर समीर जैन को गिरफ़्तार किया है. उसके पकड़े जाने के बाद मरीजों के सीने में नकली पेसपेकर लगाने की ऐसी-ऐसी कहानियों का खुलासा हो रहा है कि जांच करने वाली पुलिस भी हैरान है.
अगर नटवरलाल आज जिंदा होता तो वो आज इस बात पर फक्र करता कि उसने लोगों को ठगा ज़रूर लेकिन कभी किसी की जान नहीं ली. मगर जिस चालबाज और लालची शख्स की कहानी हम आपको बताने जा रहे हैं, वो कोई नटवरवाल नहीं बल्कि ऐसा डॉक्टर है, जिसने मरीजों की जिंदगी ही ठग ली. यूपी के उस लालची डॉक्टर ने अपने अस्पताल में 600 से ज्यादा मरीजों को ऐसे पेसमेकर लगा दिए जो या तो नकली थे या फिर किसी चालू कंपनी के. इस पूरे जानलेवा मामले का खुलासा अब जांच के बाद हुआ है. लेकिन ख़बरों के मुताबिक, इनमें से 200 लोगों की जान चली गई. आइए आपको विस्तार से बताते हैं, 'डॉक्टर डेथ' की दिल दहला देने वाली कहानी.
केस नंबर- 1 उत्तर प्रदेश के इटावा की रहने वाली 46 साल की नूरबानो को अचानक दिल का दौरा पड़ा. घरवाले फ़ौरन उन्हें पास के सरकारी अस्पताल लेकर गए, जहां डॉक्टरों ने उन्हें पेसमेकर लगाने की सलाह दी. लेकिन हद तो ये रही कि ऑपरेशन के बाद सर्जन ने पेसमेकर सीने के अंदर नहीं बल्कि बाहर ही चिपकाकर छोड़ दिया. इसके बाद नूरबानो के साथ-साथ उनके घरवाले भी करीब ढाई महीने तक इस पेसमेकर से जूझते रहे और आखिरकार नूरबानों की मौत हो गई.
केस नंबर- 2 इटावा की ही रहनेवाली 40 साल की नजीमा को भी दिल की बीमारी थी. उन्हें घरवालों ने सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी हॉस्पीटल में भर्ती करवाया. उनके इलाज में करीब 4 लाख रुपये खर्च किए. उन्हें भी पेसमेकर लगाया गया लेकिन आखिरकार नजीमा की भी जान चली गई.
केस नंबर- 3 46 साल की रेशमा को भी हार्ट में प्रॉब्लम था. रेशमा को भी उसी अस्पताल में पेसमेकर लगाया गया, जिस अस्पताल में नूरबानो और नज़ीमा को पेसमेकर लगा था. लेकिन इत्तेफाक देखिए कि लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद रेशमा की जिंदगी भी नहीं बची.
सस्ते, नकली पेसमेकर का इस्तेमाल ये तीनों के तीनों के तीनों केस स्टडीज सिर्फ़ कोई दर्दनाक इत्तेफ़ाक नहीं. बल्कि इन मौत के पीछे लालच, धोखे और हैवानियत की एक ऐसी कहानी छुपी है, जिस पर यकीन करना भी मुश्किल है. क्या आप मान सकते हैं कि इन तीनों के तीनों मरीजों का इलाज एक ही डॉक्टर ने किया था और उस डॉक्टर ने सिर्फ चंद रुपयों की लालच में धोखे से इन मरीजों के सीने में असली पेसमेकर की जगह नकली पेसमेकर डाल दिया?
नकली पेसमेकर से गई मरीजों की जान जिसका नतीजा ये हुआ कि कुछ दिनों तक सस्ते और घटिया पेसमेकर से जूझने के बाद इन सभी के सभी मरीजों की जान चली गई. लोग डॉक्टर को भगवान का दूसरा रूप मानते हैं. आम तौर पर मरीज़ डॉक्टर पर आंख मूंद कर भरोसा करते हैं. लेकिन जब कोई डॉक्टर चंद रुपयों की ख़ातिर अपने पेशे से ही गद्दारी करने लगे, लोगों की ज़िंदगी दांव पर लगा दे, तो कोई क्या ही कर सकता है.

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