
लहर बनाम लहरः कैसे बंगाल में हो गया खेल, ममता ने लगा दिया न्यूटन का तीसरा नियम
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बंगाल में भाजपा हिंदू ध्रुवीकरण का दांव खेल रही थी. लेकिन इस मोदी लहर को रोकने के लिए एक और लहर बन गई और राजनीति के रण में क्षेत्रीय ब्रह्मास्त्र भारी पड़ा.
विज्ञान के छात्र जानते होंगे कि न्यूटन ने बल के तीन नियम दिए. तीसरा नियम है क्रिया-प्रतिक्रिया का नियम. यह नियम कहता है कि प्रत्येक क्रिया के समान एवं विपरीत प्रतिक्रिया होती है. पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणामों को देखें तो ऐसा प्रतीत होता है कि ममता के लिए न्यूटन का यह तीसरा नियम ही संजीवनी साबित हुआ. बंगाल में भाजपा ध्रुवीकरण का दांव खेली. हिंदू वोटों को लामबंद करना, पिछड़ों-दलितों को साथ लेना और टीएमसी के लश्कर से सेनापतियों को तोड़कर उसे एक डूबता हुआ जहाज साबित करना, इसी गणित पर आधारित थी भाजपा की रणनीति. एक लहर बनाई गई कि तृणमूल कांग्रेस कमज़ोर पड़ रही है और हिंदू जाग गया है. भाजपा ऐसा कर पाने में खासी सफल भी रही. ऐसा न होता तो पिछले विधानसभा चुनाव में तीन सीट जीतने वाली भाजपा राज्य की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी और एक दमदार विपक्ष के रूप में न उभर पाती. लेकिन तैयारी विपक्ष की तो नहीं थी. अमित शाह अपने हर साक्षात्कार में 200 के जादुई आकड़े को बहुत आसानी से अर्जित की जा सकने वाली संख्या बताते रहे. उन्हें उम्मीद थी कि वाम और कांग्रेस का गठबंधन अगर अपना पुराना प्रदर्शन भी दोहरा लेगा और हिंदू ध्रुवीकरण हो पाएगा तो चुनाव के रण में चमत्कार संभव है. किसी को भी यह उम्मीद नहीं थी कि कांग्रेस और वामदल इतना बुरा प्रदर्शन करेंगे. 10 साल के शासन की एंटीइन्कंबैंसी से कुछ वोट हिंदू होकर भाजपा को मिलता तो कुछ भाजपा विरोधी वोट वामदल-कांग्रेस के गठबंधन में भी शिफ्ट होता.
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