
लटकते ताबूतों का रहस्य... क्यों लाशों को लटका देते थे ये लोग! सदियों बाद हुआ खुलासा
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हजारों साल पहले लोग अपने रिश्तेदारों के शव को ताबूत में बंदकर पहाड़ों से लटका देते थे. इन 'लटकते ताबूत' वाली प्रथा से जुड़ी प्राचीन जनजाति के वंशज आज भी जीवित हैं. हाल में ही खोजकर्ताओं ने इस प्रथा के पीछे की सच्चाई खोज निकाली है.
प्रागैतिहासिक काल में एक जातीय समूह लंबे समय तक अपने मृतकों को ताबूतों में बंदकर पहाड़ों पर लटकाया करते थे. वैज्ञानिकों ने सालों इस पर रिसर्च करने के बाद दावा किया है कि जिस प्राचीन लोगों के बीच यह प्रथा प्रचलित थी उनके वंशज आज भी जीवित हैं.
डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक, शोधकर्ता उस प्रागैतिहासिक समूह को देखकर हैरान रह गए जो अपने मृतकों को "लटकते ताबूतों" में छोड़ देते थे. इससे भी चौंकाने वाली बात यह मिली कि उनके वंशज आज भी जीवित हैं.
दक्षिण-पश्चिमी चीन में रहने वाली बो जनजाति के बारे में माना जाता है कि वे सदियों पहले अपने मृतकों को ताबूतों में रखकर पहाड़ों से लटका देते थे. अब, मानवविज्ञानियों ने एक चौंकाने वाली खोज की है कि जनजाति की ये प्रथाएं कई शताब्दियों तक, यहां तक कि आधुनिक समय के अपेक्षाकृत निकट तक भी जारी रहीं.
रिसर्च में उस प्राचीन जनजातीय समूह और उसके वंशजों के बीच गुप्त आनुवंशिक संबंध का पता चला, जो उस पुराने क्षेत्र में रहते हैं, जहां प्रागैतिहासिक समूह रहता था. इससे उस भूमि पर रहने वाले लोगों के जीवन और उनकी प्रागैतिहासिक परंपराओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब खोजने में भी मदद मिली है.
वैज्ञानिकों ने पता लगाया था कि प्राचीन सभ्यता के लोग मृतकों को ऊंचे पहाड़ों पर ले जाकर उनके ताबूतों को चट्टानों से लटका देते थे. लाइव साइंस के अनुसार , शोधकर्ताओं ने आनुवंशिक अध्ययन किए और पाया कि इन विचित्र अंत्येष्टि प्रथाओं को निभाने वाले लोग आज भी किसी न किसी रूप में उस इलाके में जीवित हैं.
पिछले महीने एक शोध में हुआ खुलासा पिछले महीने नेचर कम्युनिकेशंस पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन में कहा गया है कि लटकते हुए ताबूत पर रिसर्च के परिणाम इस दफन प्रथा की आनुवंशिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक जड़ों के बारे में बहुमूल्य जानकारी प्रदान करते हैं. ऐसा माना जाता है कि ये परंपराएं नवपाषाण युग से चली आ रही थीं. कुछ सौ साल तक यह परंपरा चलती रही थी.

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