
लखनऊ और बिहार... घर में रखी बंदूक से पिछले 24 घंटे में दो एक्सीडेंटल मौतें..., जानिए हथियार को रखने का नियम क्या है, क्या सावधानियां बरतने की जरूरत?
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यूपी और बिहार में घर में रखी बंदूक से पिछले 24 घंटे में दो एक्सीडेंटल मौतें हुई हैं. लखनऊ में लाइसेंसी राइफल से खेल-खेल से 12 साल के लड़के की जान गई है. पटना में साढ़े तीन साल की बच्ची की अवैध पिस्तौल से गोली लगने से मौत हुई है. वैसे तो भारत में शस्त्र रखने के लिए लाइसेंस अनिवार्य है. बिना लाइसेंस के किसी भी प्रकार का शस्त्र रखना गैरकानूनी है. हथियार रखने के नियम भी बनाए गए हैं.
यूपी के लखनऊ और बिहार के पटना से दो ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जिसमें लाइसेंसी हथियार (बंदूक) रखने में लापरवाही वजह से मासूम बच्चों की जान चली गई है. इन दोनों घटनाओं के बाद लाइसेंसी हथियार (बंदूक) को लेकर बहस छिड़ गई है. पिछले 24 घंटे में दोनों एक्सीडेंटल मौतों से सिस्टम पर भी सवाल उठ रहे हैं. हालांकि, नियमों की अनदेखी किए जाने के ये पहले मामले नहीं हैं. इससे पहले भी लाइसेंस धारक की लापरवाही का खामियाजा परिवार या अन्य लोगों को भुगतना पड़ा है. आइए जानते हैं कि हथियार रखने के नियम क्या हैं और क्या सावधानियां बरतनी जरूरी होती हैं...
पहले जान लीजिए कि भारत में आर्म्स एक्ट क्या कहता है? बिना लाइसेंस के फायर आर्म्स रखने वाले किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध पुलिस या कानून प्रवर्तन एजेंसियां शस्त्र अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर सकती हैं. भारत में आर्म्स एक्ट 1857 के सिपाही विद्रोह (मेरठ की घटना) के बाद अस्तित्व में आया. उसके बाद अंग्रेजों ने 1878 का शस्त्र अधिनियम लागू किया, जिसके तहत कोई भी भारतीय तभी हथियार रख सकता था, जब अंग्रेजों को यकीन हो जाए कि वो क्राउन के प्रति वफादार है. आजादी के बाद इस कानून को खत्म कर दिया गया और देश में भारतीय शस्त्र अधिनियम लागू किया गया. यह लाइसेंस राज्य स्तर या राष्ट्रीय स्तर का हो सकता है.
भारत में गन लाइसेंस लेने की पूरी प्रक्रिया क्या है?
भारत में गन कानून बेहद सख्त हैं और हथियार लाइसेंस हासिल करना एक लंबी प्रक्रिया का हिस्सा है. इसमें एक साल तक का समय लग सकता है. भारत में हथियार लाइसेंस चाहने वाले व्यक्ति की उम्र 21 वर्ष होनी चाहिए. बंदूक रखने के वैध कारण खेल, फसल सुरक्षा और आत्मरक्षा हैं. लाइसेंस के लिए सबसे पहले आपको अपने नजदीकी पुलिस अधिकारी से संपर्क करना होगा. वे आपके व्यक्तिगत और परिवारिक पृष्ठभूमि का परीक्षण करेंगे. यदि आवश्यक होगा तो आपको पुलिस अधिकारी द्वारा निर्धारित अस्थायी बंदूक द्वारा टेस्ट के लिए भेजा जा सकता है. - अगर आपको गन लाइसेंस की जरूरत है तो सबसे पहले फॉर्म 4 भरना होगा. लाइसेंस के लिए स्थानीय पुलिस स्टेशन या जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय में आवेदन दिया जा सकता है. आवेदन पत्र में व्यक्तिगत जानकारी, गन का जरूरत अनुसार विवरण और अन्य संबंधित जानकारी भरनी होती है. आपको आवेदन के साथ अपने व्यक्तिगत पहचान प्रमाण पत्र, पते का प्रमाण पत्र और अन्य जरूरी दस्तावेज भी जमा करने होते हैं. - आपके दस्तावेज और आवेदन की समीक्षा के बाद पुलिस अधिकारी आपके पृष्ठभूमि और बैकग्राउंड की जांच करेंगे. यह सुनिश्चित करेंगे कि आपके पास बंदूक की अनिवार्यता है या नहीं और आप अनुशासित रूप से इसका उपयोग करेंगे या नहीं? पुलिस आपके आपराधिक रिकॉर्ड, मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक व्यवहार की जांच करेगी. - कभी-कभी आवेदक का साक्षात्कार भी लिया जा सकता है. यदि पुलिस सत्यापन और अन्य प्रक्रियाएं संतोषजनक पाई जाती हैं तो जिला मजिस्ट्रेट या लाइसेंसिंग प्राधिकरण लाइसेंस जारी करता है. यदि आपका आवेदन स्वीकृत होता है तो आपको बंदूक लाइसेंस प्राप्त होगा. इसमें बंदूक की प्रकार, संख्या, आवेदक के नाम, और उपयोग की शर्तें शामिल हो सकती हैं. - इस पूरी प्रक्रिया में स्थानीय कानूनों और नियमों का पालन करना महत्वपूर्ण होगा. बंदूक के उपयोग की शर्तों का पालन करना जरूरी है. व्यापारिक और शिक्षात्मक उद्देश्यों के लिए बंदूक लेने की प्रक्रिया भी अलग हो सकती है.
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भारत में गन रखने के नियम क्या हैं?

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