
राहुल गांधी बनाम चुनाव आयोग: सियासी रूप से मजबूत, कानूनी नजरिए से खोखले हैं कांग्रेस नेता के आरोप!
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संविधान का अनुच्छेद 324 चुनाव आयोग को व्यापक अधिकार देता है कि वह स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करे. सुप्रीम कोर्ट के कई फ़ैसलों में ECI को Plenary Powers प्रदान किए गए हैं, जो कानून में कमी होने पर भी कार्रवाई की अनुमति देते हैं.
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पिछले हफ्ते एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा था कि 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान बड़े पैमाने पर वोटरों की धोखाधड़ी हुई थी. इसके लिए उन्होंने विशेष रूप से कर्नाटक की महादेवपुरा सीट का भी उदाहरण दिया.
उन्होंने दावा किया कि डुप्लिकेट प्रविष्टियों, फर्जी पतों, थोक पंजीकरण और एक ही EPIC नंबर का उपयोग करके कई वोट डाले जाने के कारण 1,00,000 से अधिक वोट "चुराए गए". उन्होंने एक मतदाता शकुन रानी के कथित तौर पर दो बार वोट डालने का भी उदाहरण दिया.
चुनाव आयोग (ECI) ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि ये पुराने और पहले से खारिज किए गए दावों की पुनरावृत्ति हैं. ECI ने गांधी से कहा कि वे या तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत औपचारिक शिकायत दर्ज करें या शपथ-पत्र के साथ दस्तावेजी सबूत पेश करें.
राहुल से मांगा गया शपथ पत्र
कर्नाटक, महाराष्ट्र और हरियाणा के मुख्य चुनाव अधिकारियों ने भी राहुल गांधी को पत्र लिखकर आरोपों का ब्योरा और सबूत शपथ के तहत देने को कहा, ताकि जांच शुरू की जा सके.
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