
राजा रघुवंशी हत्याकांड में बड़ा ट्विस्ट... अदालत में बयान से पलटे दो आरोपी, खुद को बताया साजिश से अनजान!
AajTak
सनसनीखेज राजा रघुवंशी हत्याकांड की शुरुआती योजना पीड़ित को गोली मारने की थी, लेकिन बाद में उसे धारदार हथियार से मार दिया गया. सोनम और राज कुशवाह ने इंदौर में सबूत मिटाने की कोशिश की. उधर, दो आरोपियों ने कोर्ट में अपने बयान बदल दिए.
New Twist in Raja Raghuvanshi Murder Case: इंदौर के कारोबारी राजा रघुवंशी को खाई में धक्का देकर या फिर तेजधार हथियार से वार करके मारने का प्लान बाद में बना था. असल में पहले राजा को गोली मारकर मौत के घाट उतारने का ही प्लान था. इसके लिए सोनम और राज कुशवाह ने एक पिस्टल भी खरीद ली थी. मेघालय पुलिस की टीम ने इंदौर पुलिस के साथ मिलकर वो पिस्टल बरामद कर ली है. इतना ही नहीं शातिर सोनम ने अपना लैपटॉप और राजा का मोबाइल फोन भी इंदौर में जलाने की कोशिश की थी. और सबसे बड़ी खबर ये है कि इस मामले के दो आरोपी कोर्ट में जाते ही अपने पुराने बयान से पलट गए.
कोर्ट में बयान से पलटे दो आरोपी इस हत्याकांड में अब अहम पड़ाव आ चुका है. जब कत्ल जैसे इस संगीन गुनाह में राज और सोनम का साथ देने वाले तीन आरोपियों विशाल चौहान, आकाश राजपूत और आनंद कुर्मी को कोर्ट में जज के सामने पेश किया गया, तो आकाश और आनंद अपने पहले बयान से पलट गए और उन दोनों ने कहा कि जो कुछ भी किया सोनम और विशाल ने किया. उन दोनों ने ही राजा को धक्का दिया और उसका मर्डर किया. वे दोनों तो दूर खड़े थे. उन्होंने कोर्ट में भी कहा कि वे दोनों तो केवल सोनम की सुरक्षा के लिए उसके साथ गए थे. आकाश और आनंद के इस बयान से मामले में नया ट्विस्ट आ गया है.
नाले में छानबीन उधर, इंदौर के इंडस्ट्रियल पैलेस में मौजूद है ओल्ड पलासिया इलाका. जहां एक नाले में मेघालय और इंदौर की पुलिस कुछ तलाशने पहुंची थी. पुलिस नाले में एक खास जगह पर ही लगातार अपने हाथ गंदे कर अंदर से कुछ ढूंढने की कोशिश कर रही थी. काफी मशक्कत के बाद आखिरकार पुलिस को नाले से कुछ चीजें मिलती हैं. जिन्हें पुलिसकर्मी एक पॉलीथिन में रखते जाते हैं.
राख के ढेर से हाथ लगे सुराग इंदौर की ही हरेकृष्ण विहार कॉलोनी भी मेघालय और इंदौर पुलिस की टीम फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स के साथ जलाए दिए गए कुछ सामान में से सबूतों को इकट्ठा करने की कोशिश करती है. कुछ अहम सबूत और सुराग राख के ढेर से हाथ लग जाते हैं.
लोकेंद्र तोमर - ग्वालियर का रहने वाला लोकेंद्र इंदौर के उस फ्लैट का मालिक है, जिस फ्लैट में राजा रघुवंशी के कत्ल के बाद करीब 2 हफ्ते सोनम छुप कर रह रही थी.
शिलोम जेम्स - जिस बिल्डिंग में सोनम ने किराये पर फ्लैट लिया था, ये उसका केयरटेकर है.

ईरान अपने सुरक्षा प्रमुख की मौत के शोक में डूबा हुआ है और इंतकाम की कसमें खा रहा है. उधर इजरायल और अमेरिका इस उम्मीद में हैं कि उसने ईरान के तमाम बड़े नेता, कमांडर और प्रमुख मार दिए हैं, तो अब ईरान सरेंडर करेगा. लेकिन ईरान सरेंडर के मोड में नहीं है. इस बीच दुनिया हैरान है कि जब इजरायल और अमेरिका इतने हमले कर रहा है तो ईरान के सुरक्षा प्रमुख खुद को सुरक्षित क्यों नहीं रख पाए. इजरायल ने कैसे अली लारीजानी को मारा.

जैसे जैसे अमेरिका, इजरायल और ईरान का युद्ध आगे बढ़ रहा है वैसे वैसे तबाही की तस्वीरें सामने आ रही हैं, एक तरफ अमेरिका और इजरायल ईरान को निशाना बना रहे हैं उनके शहरों में धमाके कर रहे हैं. दूसरी ओर ईरान भी पलटवार कर रहा है. लेकिन आज सुबह इजरायली हमले के बाद बेरूत का रिहायशी इलाका कब्रगाह में बदल गया और चीख पुकार मचने लगी, इजरायल ने बेरूत में 22 मंजिला इमारत को निशाना बनाया गया.

दिल्ली-एनसीआर में पश्चिमी विक्षोभ के असर से मौसम अचानक बदल गया है. ठंडी हवाएं, बादल और हल्की बारिश से तापमान में गिरावट आई है और लोगों को गर्मी से राहत मिली है. मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक हल्की बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं का अनुमान जताया है. गुरुवार और शुक्रवार के लिए येलो अलर्ट जारी है. तापमान 27 से 31 डिग्री के बीच रह सकता है और 21 मार्च के बाद मौसम धीरे-धीरे साफ होगा.

16 मार्च को वाराणसी में गंगा में नाव पर इफ्तार पार्टी मनाना कुछ मुस्लिम युवकों को महंगा पड़ गया. बीजेपी और हिंदूवादी संगठन का आरोप है कि, इन लोगों ने रोजा इफ्तार पार्टी करने के बाद गंगा नदी में बिरयानी और हड्डियां फेंक दीं. जैसे ही स्थानीय बीजेपी नेता की ओर से इन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई, पुलिस हरकत में आई और आनन फानन में 14 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. अब संत समाज और बीजेपी इसे हिंदुओं के खिलाफ सोची समझी साजिश करार दे रहे हैं तो विपक्ष पूछ रहा है कि, गंगा में इफ्तार पार्टी करने से कौन सा कानून तोड़ा गया जो पुलिस ने इन लोगों को गिरफ्तार कर लिया. सवाल है कि, ये कौन लोग हैं जिन्हें यूपी की अमन शांति रास नहीं आ रही.

जेडीयू नेता केसी त्यागी ने पार्टी की सदस्यता का नवीनीकरण न कराकर अपने राजनीतिक रुख को स्पष्ट कर दिया है. उनके इस कदम को बिहार की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों और नेतृत्व परिवर्तन की संभावनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है. साथ ही, पार्टी के भीतर नई पीढ़ी के उभार और पुराने नेताओं की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं.








