
राजस्थान के गांवों में कहर बरपा रहा है कोरोना, सीकर के 4 गांवों में ही 97 लोगों की मौत
AajTak
फतेहपुर के दातरू में 15 दिनों में 32 लोगों की मौत हो गई. इसी तरह मगलुना में 14 दिनों मे 29 मौतें, खीरवा में 28 दिन में 26 मौतें और फतेहपुर के नारी गांव में 10 मौतें हो चुकी है. अभी कई लोगों की तबीयत खराब है.
राजस्थान में कोरोना संक्रमण की रफ्तार ने व्यवस्थाओं को हांफने पर मजबूर कर दिया है. लगातार अस्पतालों पर लोड बढ़ रहा है. नतीजन सभी बेड फुल हैं. जरूरतमंदों के पास इंतजार के अलावा कोई विकल्प नहीं है. ऐसी ही समस्याओं की हकीकत जानने के लिए आजतक की टीम सीकर जिले के फतेहपुर के राजकीय धानुका अस्पताल के कोविड सेंटर पर पहुंची. अस्पताल के सारे बेड फुल हैं. नए मरीज जो भी आ रहे हैं, उन्हें बेड खाली होने का इंतजार करना पड़ रहा है. यहीं पर आजतक को एक ऐसी परिवार की कहानी पता चली, जो कोरोना काल में पूरी तरह से तबाह हो गया. रोरुं बड़ी में एक ही परिवार के पांच लोगों की कोरोना संक्रमण से मौत हो गई. इस परिवार का छठा सदस्य अभी वेंटिलेटर पर है.
आज जब वक्त इतना कीमती हो गया है कि लोग हरेक चीज की दस मिनट में डिलीवरी चाहते हैं. वहीं दूसरी तरफ विडंबना ये है कि भारत का एक शहर ऐसा है जहां इंसान को कहीं जाने के लिए सड़कों पर ट्रैफिक में फंसना पड़ता है. यहां हर साल औसतन 168 घंटे लोग ट्रैफिक में फंसे रहते हैं. यानी पूरे एक हफ्ते का समय सिर्फ ट्रैफिक में चला जाता है.

जिस शहर की फायरब्रिगेड के पास छोटे से तालाब के पानी से एक शख्स को निकालने के लिए टूल नहीं है, वह किसी बड़े हादसे से कैसे निबटेगा. युवराज मेहता की मौत ने नोएडा की आपदा राहत तैयारियां की कलई खोल दी है. सवाल यह है कि जब नोएडा जैसे यूपी के सबसे समृद्ध शहर में ये हालात हैं तो बाकी शहर-कस्बों की स्थिति कितनी खतरनाक होगी.

दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता में सुधार के कारण कमीशन ऑफ एयर क्वालिटी इंप्रवूमेंट (CAQM) ने GRAP-3 पाबंदियां हटा दी हैं. AQI में सुधार के चलते अब कंस्ट्रक्शन और आवाजाही पर लगी पाबंदियों में राहत मिली है. IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में AQI 'एवरेज' से 'खराब' श्रेणी में रह सकता है, जिसके कारण GRAP-3 के तहत गंभीर पाबंदियां लागू नहीं की जाएंगी.

AIMIM प्रवक्ता वारिस पठान ने स्पष्ट किया है कि मुसलमानों ने अब फैसला कर लिया है कि वे अब किसी भी ऐसे व्यक्ति को समर्थन नहीं देंगे जो केवल जातीय विभाजन करता है, बल्कि वे उस नेता के साथ जाएंगे जो विकास की बात करता है. उनका यह बयान समाज में सकारात्मक बदलाव और विकास को प्राथमिकता देने की दिशा में है. मुसलमान अब ऐसे नेताओं के साथ खड़े होंगे जो उनकी बेहतरी और समाज के समग्र विकास के लिए काम करें.









