
यौन शोषण, पुलिस-डॉक्टरों की लापरवाही और सच दबाने की साजिश... NEET छात्रा की डेथ मिस्ट्री का पूरा सच
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पटना में NEET की तैयारी कर रही छात्रा की मौत ने पुलिस और अस्पताल प्रशासन की लापरवाही उजागर कर दी है. पोस्टमार्टम और फोरेंसिक रिपोर्ट में रेप की कोशिश के सबूत मिले हैं, जबकि शुरुआत में इसे आत्महत्या बताया गया था. जानिए इस सनसनीखेज मामले की परत-दर-परत सच्चाई.
Patna NEET Student Death Case: वो 6 जनवरी का दिन था. नीट की एक छात्रा पटना के सहज सर्जरी अस्पताल में लाई जाती है. उसकी हालत गंभीर थी. कहा जाता है कि उसने नींद की गोलियां खा रखी थीं. अगर ऐसा था तो मामला खुदकुशी की कोशिश का था. अब सवाल है कि फिर भी अस्पताल प्रशासन ने पुलिस को इसकी खबर क्यों नहीं दी? किसके दबाव में नहीं दी? नीट छात्रा का ये पूरा मामला असल में पटना के चित्रगुप्त नगर थाना इलाके का है. अब मामला इतना बढ़ गया कि पुलिस प्रसासन सवालों के घेरे में आ गया.
पुलिस की लापरवाही 6 जनवरी को उस नीट छात्रा को सहज अस्पताल से आईसीयू की कमी के चलते डॉक्टर प्रभात हॉस्पिटल भेजा गया. तब पहली बार 6 जनवरी की रात को ही चित्रगुप्त नगर थाने को इस बात की खबर दी गई. पर कमाल देखिए कि चित्रगुप्त नगर थाने की एसएचओ रोशनी कुमारी को छोड़िए थाने का एक अदद सिपाही भी मामले की जांच के लिए ना अस्पताल पहुंचा ना हॉस्टल. पहली बार एफआईआर भी 9 जनवरी को लिखी गई. थाने की एसएचओ रोशनी कुमारी की इसी लापरवाही के चलते अब जाकर उन्हें सस्पेंड किया गया है.
तीन दिनों तक नहीं पहुंची थी पुलिस ज़रा सोचिए हॉस्टल का जो कमरा एक तरह से पूरा क्राइम सीन था, जिस कमरे में पीड़़िता बेहोश मिली थी. उस कमरे को सील करना तो छोड़िए उसकी जांच करने या वहां से कोई सबूत हासिल करने के लिए भी अगले तीन दिनों तक पुलिस पहुंची ही नहीं. ना फ़ॉरेंसिक टीम ही वहां गई. यानि पूरे तीन दिनों तक ना हॉस्टल सील हुआ, ना कमरा, ना बिस्तर, ना पीड़िता के कपड़े. यहां तक की पीड़िता के जिन अंडर गार्मेंट्स से स्पर्म मिले हैं, वो कपड़े भी खुद पुलिस ने बरामद नहीं किए बल्कि वो कपड़े पीड़िता के मां बाप ने पुलिस को सौंपे.
फोरेंसिक और पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने बदला केस वो कपड़े भी 10 जनवरी को पुलिस के हवाले किए गए थे, लेकिन पटना पुलिस ने उन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा ही नहीं. वो तो जब पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में रेप की कोशिश की बात सामने आई तब कहीं जाकर इन कपड़ों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया. और अब जब पूरा केस ही फोरेंसिक और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद बदल चुका है, तब पीड़िता के कमरे की तलाशी ली जा रही है.
एसएचओ और दरोगा सस्पेंड पटना पुलिस की इन्हीं लापरवाहियों का ठीकरा किसी पर तो फोड़ना था. लिहाजा, चित्रगुप्त नगर थाने की एसएचओ रोशनी कुमारी और कदमकुआं थाने के दरोगा हेमंत झा को सस्पेंड कर बाकी सीनियर अफसरों ने अपना पल्ला झाड़ लिया. पटना पुलिस से केस लेकर डीजीपी पहले ही जांच एसआईटी को सौंप चुके थे. लेकिन एसआईटी पर भी उंगली उठ रही थी क्योंकि एसआईटी में वो पुलिस अफसर भी शामिल थे, जिन पर इस केस का मर्डर करने का इल्जाम था. जैसे एएसपी अभिनवर कुमार और पटना एसएसपी कार्तिकेय शर्मा.
गृहमंत्री ने ली अधिकारियों की बैठक इसी के बाद बिहार के नए-नए बने गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार के डीजीपी विनय कुमार और सीनियर पुलिस अफसरों के साथ एक मीटिंग की. इस मीटिंग में एसआईटी की टीम भी शामिल थी. पूरे हफ्ते भर बाद भी एसआईटी कुछ कर नहीं पा रही थी. इसीलिए गृह मंत्री ने एसआईटी के साथ-साथ मामले की जांच में सीआईडी को भी शामिल कर दिया.

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