
ये हैं लोकसभा चुनाव 2024 के 7 सुपर स्टार, जिन्होंने विरोधियों के छक्के छुड़ा दिये
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भारतीय राजनीति के कई खिलाड़ियों के लिए लोकसभा चुनाव सरवाइवल की जंग हो गई थी, लेकिन अपने सतत संघर्ष की बदौलत कई रणबांकुरों ने मंजिल पा ली है - अखिलेश यादव से लेकर उद्धव ठाकरे तक सभी के मामले में रवायत मिलती जुलती ही है.
1. अखिलेश यादव
एक बार फिर साबित हो गया है कि डिंपल यादव की हार के बाद अखिलेश यादव जब मैदान में उतरते हैं तो बड़ी जीत हासिल करते हैं. 2009 में डिंपल यादव को पहली बार फिरोजाबाद लोकसभा सीट पर उपचुनाव में समाजवादी पार्टी का उम्मीदवार बनाया गया था. कांग्रेस के राज बब्बर ने डिंपल यादव को चुनाव हरा दिया था.
हार के उसी दर्द के साथ अखिलेश यादव ने साइकिल उठाई और निकल पड़े थे. तब यूपी में मायावती की सोशल इंजीनियरिंग वाली सरकार थी - और मुलायम सिंह यादव का दिल्ली में मन लगने लगा था.
तीन साल की कड़ी मशक्कत के बाद अखिलेश यादव घर तभी लौटे जब 2012 में समाजवादी पार्टी को यूपी के लोगों ने सत्ता सौंप दी. अखिलेश यादव मुख्यमंत्री बने और जब उनकी खाली की हुई कन्नौज सीट पर चुनाव हुए तो ऐसे इंतजाम किये गये कि डिंपल यादव निर्विरोध जीत कर संसद पहुंच गईं.
2014 का चुनाव तो डिंपल यादव बड़े आराम से जीत गईं, लेकिन 2019 में मायावती की बीएसपी के साथ गठबंधन के बावजूद कन्नौज सीट गंवा बैठीं - 10 साल बाद अखिलेश यादव के लिए दोबारा वैसा ही सदमा था - और सदमे से तो वो डिंपल की मैनपुरी की जीत के साथ ही उबर चुके थे, लेकिन बीजेपी से बदला अब जाकर पूरा हुआ है.
'करो या मरो' - अखिलेश यादव ने ये यूं ही नहीं कहा था. 2017 और 2022 ही नहीं, 2014 और 2019 में पांच-पांच सीटें ही मिली थीं, जिससे डिंपल यादव बाहर थीं.

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