
म्यांमार में सैन्य तानाशाही के 26 महीने... ताबड़तोड़ एयरस्ट्राइक और सेना के एक्शन में 3000 मौतें, 18 लाख लोग विस्थापित, भुखमरी के हालात
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यूं तो म्यांमार में सैन्य शासन का इतिहास काफी पुराना है. इस देश ने 1962 से सेना की तानाशाही झेली है. लेकिन अब हालात बेहद खराब हो चुके हैं. सेना एयर स्ट्राइक कर बगावती जनता को शांत कराने की कोशिश कर रही है. दिन ब दिन मरने वालों की तादाद बढ़ रही है और लोकतंत्र समर्थक नेता आंग सान सू की अब भी जेल में ही हैं.
मांडले, म्यांमार का दूसरा सबसे बड़ा शहर... यहां से 110 किलोमीटर दूर कनबालु टाउनशिप के पजीगी गांव में मंगलवार को सैंकड़ों लोगों की भीड़ जमा हुई. सागैंग प्रांत के इस गांव में म्यांमार की सेना (जुंटा) के खिलाफ लड़ रहे विद्रोही गुट राष्ट्रीय एकता सरकार (NUG) के कार्यालय का उद्घाटन होना था.
दर्जनों बच्चे भी इस कार्यक्रम में मौजूद थे. इन बच्चों को उद्घाटन के मौके पर आयोजित डांस कार्यक्रम में परफॉर्म करने के लिए बुलाया गया था. अचानक एक मिसाइल सीधे NUG कार्यालय पर गिरी. चारों तरफ चीख पुकार मच गई. इससे पहले कि लोग कुछ समझ पाते, कार्यालय के ठीक ऊपर एक हेलिकॉप्टर आया और अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी. इस घटना में 100 से ज्यादा लोग मारे गए. इतने ही लोग इलाज के लिए इस वक्त अस्पताल में भर्ती हैं.
म्यांमार के लोगों पर सेना की यह एयरस्ट्राइक पहली बार नहीं हुई है. इससे पहले भी वहां आर्मी आम लोगों को निशाना बनाती रही है. अब तक तीन हजार से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं. ये आंकड़ा दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है. आइए आपको बताते हैं कि म्यांमार की सेना वहां के लोगों पर किस तरह कहर ढा रही है.
> 13 हजार से ज्यादा लोगों को म्यांमार की सेना हिरासत में रखा है, जिन्हें अमानवीय परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है.
> सेना ने 100 से ज्यादा कैदियों को मौत की सजा सुनाई है. इन कैदियों को किसी भी वक्त फांसी पर लटकाया जा सकता है.
> सैन्य तख्तापलट का सबसे बुरा असर बच्चों पर पड़ा है. लोकतंत्र के खात्मे के बाद यहां 78 लाख बच्चों का स्कूल छूट गया है.

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