
मोदी की 7 खूबियां जो उन्हें चुनावी राजनीति में अजेय बनाती हैं
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विपक्ष की लगातार घेरेबंदी, आलोचनाएं, आर्थिक चुनौतियां, महामारी और सांप्रदायिक विवादों के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि 'मजबूत नेता' की बनी हुई है. आइये देखते हैं कि वो कौन से कारण हैं जिनके चलते पिछले 25 साल में, जिसमें 13 साल सीएम और 11 साल पीएम रहने के बावजूद वे भारत की चुनावी राजनीति में अजेय बने हुए हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजनीतिक सफर की कहानी एक असाधारण दस्तावेज है. 2001 से 2014 तक गुजरात में मुख्यमंत्री रहे. और गुजरात को भाजपा का अजेय किला बना दिया. फिर केंद्र में पूर्ण बहुमत के साथ भाजपा को 2014 में सत्ता दिलाई. इससे पहले 1984 में यह कामयाबी कांग्रेस को मिली थी. फिर मोदी लगातार 11 वर्षों से सत्ता में कायम हैं. मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के कार्यकाल का जोड़ लिया जाए तो करीब 25 वर्ष से किसी न किसी तरह सत्ता का संचालन कर रहे हैं. यह इसलिए खास हो जाता है कि इंटरनेट के दौर में जब बहुत आसानी से बड़े से बड़े नेता को एंटी-इनकंबेंसी खा जाती है, मोदी अनूठे हैं जिन्हें प्रो-इनकंबेंसी का फायदा मिल रहा है. इसीलिए ग्लोबल लीडर्स के सर्वोच्च गुट में प्रधानमंत्री मोदी का मुकाम ऊपर ही रहा है. दुनिया के कई नेता अचरज जताते हैं कि इतनी बड़ी आबादी वाले देश में मोदी अपनी लोकप्रियता को कैसे बरकरार रखे हुए हैं? आखिर वो क्या कारण है जिसके चलते चुनावी राजनीति में उन्हें कोई पछाड़ नहीं पाता है?
India Today के अगस्त 2024 और अगस्त 2025 में हुए मूड ऑफ द नेशन सर्वे के मुताबिक 50% से अधिक भारतीय उनके नेतृत्व में अपनी आस्था रखते हैं. जबकि दुनिया में उनके समकालीन लोकतांत्रिक देशों के नेताओं की दुर्गति सबके सामने हैं. अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप लगातार अपनी लोकप्रियता खो रहे हैं, यूरोप के कई देशों में नेतृत्व का संकट है, भारत के पड़ोसी देशों का हाल हम देख ही रहे हैं. ऐसी दशा में भी मोदी हर रोज लोकप्रियता की नई सीढ़ी चढ़ रहे हैं यह किसी करिश्मे से कम नहीं है.
1- नैरेटिव सेट करने में प्रधानमंत्री मोदी का कोई जवाब नहीं
राष्ट्रवाद, विकास, धर्म, या कल्याणकारी योजनाएं हों, मोदी ने हर मुद्दे पर जनता के बीच मजबूत संदेश स्थापित किया. उनकी यह कला विपक्ष को जवाब देने में उलझाए रखती है, जिससे वह अपने एजेंडे को प्रभावी ढंग से सामने नहीं ला पाता. सर्जिकल स्ट्राइक (2016), बालाकोट एयर स्ट्राइक (2019), और ऑपरेशन सिंदूर (2025) ने उनकी 'राष्ट्रीय सुरक्षा' की छवि बनाई.
आर्टिकल 370 का खात्मा (2019) और सीएए-एनआरसी ने 'मजबूत भारत' का संदेश दिया. मोदी ने 'विकसित भारत 2047' का विजन पेश किया. जीडीपी 2.04 ट्रिलियन (2014) से 3.94 ट्रिलियन (2025) हो गई. विपक्ष ने बेरोजगारी (8.5%) और महंगाई (5% CPI) पर हमला किया, लेकिन मोदी की 'आत्मनिर्भर भारत' और डिजिटल इंडिया ने युवाओं को आकर्षित किया.
राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा (22 जनवरी 2024) और 'जय श्री राम' नारे और काशी विश्वनाथ कॉरिडोर ने 80% हिंदू आबादी को एकजुट किया. विपक्ष, खासकर कांग्रेस, ने इसे 'धर्म की राजनीति' कहा पर मोदी कभी आलोचनाओं से डिगे नहीं.उनके मंदिरों में दर्शन-पूजन करने की विपक्ष ने बहुत आलोचना की पर वो अपने पहले टर्म से आज तक मंदिरों में जा रहे हैं. उनकी कई बातों के लिए आलोचना होती है पर वो आलोचनाओं से नहीं डरते.

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