
मैसूर दशहरा उद्घाटन पर विवाद खत्म! SC ने खारिज की बानू मुश्ताक के खिलाफ दायर याचिका
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सुप्रीम कोर्ट ने बुकर पुरस्कार विजेता लेखिका बानू मुश्ताक को मैसूर दशहरा समारोह उद्घाटन से रोकने वाली याचिका खारिज कर दी. कोर्ट ने कहा कि भारत धर्मनिरपेक्ष देश है और यह राज्य सरकार का कार्यक्रम है, न कि निजी धार्मिक अनुष्ठान. पहले भी मुस्लिम कवि निसार अहमद उद्घाटन कर चुके हैं.
बुकर प्राइज़ पुरस्कार विजेता लेखिका बानू मुश्ताक को इस साल के मैसूर दशहरा समारोह उद्घाटन करने के लिए आमंत्रित करने के खिलाफ दायर याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है.
अदालत ने कहा कि साल 2017 में मुस्लिम कवि निसार अहमद भी इस समारोह का उद्घाटन कर चुके हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "हमारे संविधान की प्रस्तावना के मुताबिक हमारा देश सेक्युलर है. यह राज्य सरकार का प्रोग्राम है, कोई निजी समारोह नहीं."
क्यों दायर की गई याचिका?
याचिकाकर्ता का कहना था कि दशहरा महोत्सव कोई सेक्युलर गतिविधि नहीं है, बल्कि यह एक पवित्र अनुष्ठान है, जो हिंदू धार्मिक प्रथाओं और परंपराओं के मुताबिक होता है. इसकी शुरुआत हमेशा वैदिक मंत्रोच्चार और चामुंडेश्वरी देवी की पूजा से होती है. ऐसे में बानू मुश्ताक के रूप के एक मुस्लिम महिला का चयन परंपराओं और धार्मिक भावनाओं के खिलाफ है.
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