
महाराष्ट्र राजनीति: कितना मायने रखता है अजित पवार का होना और ना होना?
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महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार का 66 साल की उम्र में निधन हो गया. अजित पवार का विमान लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया. इस हादसे में अजित पवार की मौत हो गई. अजित पवार के न होने के सियासी मायने क्या हैं?
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और एनसीपी प्रमुख अजित पवार की एक विमान हादसे में मौत हो गई. अजित पवार बुधवार को सुबह मुंबई से बारामती के लिए एक विशेष विमान से रवाना हुए थे. लैंडिंग के समय विमान में अचानक तकनीकी खराबी आ गई, जिसके चलते यह हादसा हुआ. पवार परिवार के साथ ही महाराष्ट्र की राजनीति के लिए एक बड़ा सियासी झटका माना जा रहा है.
महाराष्ट्र की राजनीति के बेताज बादशाह कहे जाने वाले अजित पवार 8 बार विधायक और छह बार डिप्टी सीएम रहे. यही नहीं, महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा बजट पेश करने वाले वो वित्त मंत्री रहे हैं. महाराष्ट्र की राजनीति के सियासी धुरी माने जाते थे तो सीएम देवेंद्र फडणवीस ने उन्हें अपने सियासी बैलेंस को बनाए रखने के लिए साथ मिला रखा था.
अब अजित पवार के अचानक निधन हो जाने के चलते महाराष्ट्र के साथ-साथ एनसीपी की राजनीति बदल गई है.
पहले समझते हैं कि अजित की संसदीय ताकत अजित पवार की दिल्ली से लेकर महाराष्ट्र तक सियासी हनक थी. संसद में फिलहाल अजित पवार की पार्टी के चार सांसद हैं, जिसमें लोकसभा में एक सदस्य है और राज्यसभा में अजित पवार की पार्टी के तीन राज्यसभा सदस्य हैं. लोकसभा में सुनील तटकरे दत्तात्रेय सांसद हैं तो प्रफुल पटेल, सुनेत्रा पवार और नितिन लक्ष्मणराव जादव राज्यसभा में सांसद हैं.
अजित पवार की पार्टी का केंद्र की मोदी सरकार को समर्थन है. दोनों ही सदनों में बीजेपी के लिए एनसीपी सियासी अहमियत रखती है. लेकिन, इससे भी बड़ी ताकत महाराष्ट्र की विधानसभा में उनकी पार्टी की है.
विधानसभा में अजित पवार की पार्टी की ताकत महाराष्ट्र की विधानसभा में अजित पवार की अपनी सियासी अहमियत रही है. अजित पवार की एनसीपी के 41 विधायक 2024 के विधानसभा चुनाव में चुनकर आए थे. अजित पवार के निधन के बाद एनसीपी के 40 विधायक रह गए हैं.

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