
महाराष्ट्र में नीचे आ रहा कोरोना का ग्राफ, 24 घंटे में 48,401 नए मामले, 572 लोगों ने तोड़ा दम
AajTak
महाराष्ट्र में रिकवरी रेट 86.4 फीसदी हो गया है. ऐसे में राज्य में अब तक 44,07,818 मरीज पूरी तरह ठीक होकर घर जा चुके हैं. राज्य में अभी कुल एक्टिव मामले 6,15,783 हैं.
देश में कोरोना की दूसरी लहर का प्रकोप चरम पर है. वहीं महाराष्ट्र से रोजाना आने वाले आंकड़ों में रविवार को कमी देखने को मिली है. जानकारी के मुताबिक रविवार को राज्य में 48,401 नए कोरोना मामले सामने आए हैं. वहीं 60 हजार 226 मरीज अस्पताल से डिस्चार्ज हुए हैं. महाराष्ट्र में रिकवरी रेट 86.4 फीसदी हो गया है. ऐसे में राज्य में अब तक 44,07,818 मरीज पूरी तरह ठीक होकर घर जा चुके हैं. राज्य में अभी कुल एक्टिव मामले 6,15,783 हैं. वहीं कोरोना से होने वाली मौत के आंकड़े को देखें तो रविवार को राज्य में 572 लोगों की मौत की खबर है. ऐसे में राज्य की मृत्यु दर 1.49 फीसदी है. अभी तक लिए गये 2,94,38,797 सैम्पल में से 51,01,737 मामले पॉजिटिव आ चुके हैं. जानकारी के मुताबिक राज्य में 36,96,896 लोग होम क्वारंटाइन हैं, वहीं 26,939 लोग केयर सेंटर में क्वारंटाइन हैं. इसके अलावा मुंबई में भी कोरोना पॉजिटिव मरीजों का आंकड़ा कम होता दिखाई दे रहा है. रविवार को मुंबई में 2,403 नए कोरोना केस दर्ज किये गए. वहीं कोरोना की वजह से 68 लोगों की मौत हो गयी. क्लिक करें- चार राज्यों में कोरोना से पिछले 24 घंटे में नहीं गई किसी की जान, राष्ट्रीय मृत्यु दर में भी गिरावट16.94 करोड़ लोगों को लगी कोरोना वैक्सीन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार 20 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में 10 लाख की आबादी पर राष्ट्रीय मृत्यु औसत (176) से कम है, जबकि 16 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में यह राष्ट्रीय स्तर से अधिक है. वहीं टीकाकरण की बात करें, इसमें भी तेजी लाई गई है. अब तक 16.94 करोड़ लोगों को कोरोना वैक्सीन की डोज दी जा चुकी हैं. कुल कोरोना वैक्सीन की डोज की बात करें तो 66.78 प्रतिशत वैक्सीन की डोज महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, केरल, बिहार और आंध्र प्रदेश को दी गई हैं, वहीं 18 से 44 वर्ष की आयु वालों को अब तक 17,84,869 को खुराकें दी जा चुकी हैं.
नोएडा केवल उत्तर प्रदेश का शो विंडो नहीं है, बल्कि प्रति व्यक्ति आय, प्रति व्यक्ति कंज्यूमर शॉपिंग, प्रति व्यक्ति इनकम टैक्स, प्रति व्यक्ति जीएसटी वसूली आदि में यह शहर देश के चुनिंदा टॉप शहरों में से एक है. पर एक शहरी की जिंदगी की सुरक्षा की गारंटी नहीं देता है. बल्कि जब उसकी जान जा रही हो तो सड़क के किनारे मूकदर्शक बना देखता रहता है.

उत्तर प्रदेश की सरकार और ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच चल रहे विवाद में नई उर्जा आई है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने खुली चुनौती के साथ योगी आदित्यनाथ को उनके शंकराचार्य होने पर सवाल उठाए हैं. इस मुद्दे ने राजनीति में तेजी से हलचल मचा दी है जहां विपक्ष शंकराचार्य के समर्थन में खड़ा है जबकि भाजपा चुप्पी साधे हुए है. दूसरी ओर, शंकराचार्य के विरोधी भी सक्रिय हुए हैं और वे दावा कर रहे हैं कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ही सच्चे स्वयंभू शंकराचार्य हैं.

उत्तर प्रदेश की सियासत में उल्टी गंगा बहने लगी है. मौनी अमावस्या के दिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के स्नान को लेकर हुआ विवाद अब बड़ा मुद्दा बन गया है. जहां खुद अविमुक्तेश्वरानंद के तेवर सरकार पर तल्ख हैं, तो वहीं बीजेपी पर शंकराचार्य के अपमान को लेकर समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रयागराज में संगम नोज तक पालकी पर जाकर स्नान करने से उन्हें रोका था.

झारखंड के लातेहार जिले के भैंसादोन गांव में ग्रामीणों ने एलएलसी कंपनी के अधिकारियों और कर्मियों को बंधक बना लिया. ग्रामीणों का आरोप था कि कंपनी बिना ग्राम सभा की अनुमति गांव में आकर लोगों को ठगने और जमीन हड़पने की कोशिश कर रही थी. पुलिस के हस्तक्षेप के बाद लगभग दो घंटे में अधिकारी सुरक्षित गांव से बाहर निकल सके.

दिल्ली के सदर बाजार में गोरखीमल धनपत राय की दुकान की रस्सी आज़ादी के बाद से ध्वजारोहण में निरंतर उपयोग की जाती है. प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल के बाद यह रस्सी नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाने लगी. इस रस्सी को सेना पूरी सम्मान के साथ लेने आती है, जो इसकी ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्ता को दर्शाता है. सदर बाजार की यह रस्सी भारत के स्वाधीनता संग्राम और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बनी हुई है. देखिए रिपोर्ट.

संभल में दंगा मामले के बाद सीजेएम के तबादले को लेकर विवाद शुरू हो गया है. पुलिस के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए गए थे लेकिन पुलिस ने कार्रवाई नहीं की. इस पर सीजेएम का अचानक तबादला हुआ और वकील प्रदर्शन कर रहे हैं. समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और AIMIM ने न्यायपालिका पर दबाव बनाने का आरोप लगाया है. इस विवाद में राजनीतिक सियासत भी जुड़ी है. हाई कोर्ट के आदेशानुसार जजों के ट्रांसफर होते हैं लेकिन इस बार बहस हुई कि क्या यहां राज्य सरकार ने हस्तक्षेप किया.







