
महायुति के मेनिफेस्टो में किसान कर्जमाफी, राहुल के मंच पर सावरकर का गीत... जानिए महाराष्ट्र की जोनल पॉलिटिक्स का गणित
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महाराष्ट्र चुनाव के लिए बीजेपी की अगुवाई वाले महायुति ने किसान कर्जमाफी के वादे का दांव चला है. राहुल गांधी की मौजूदगी में मंच से सावरकर का गीत गाया गया. इन दोनों के पीछे महाराष्ट्र की जोनल पॉलिटिक्स का गणित क्या है?
महाराष्ट्र चुनाव के लिए सत्ताधारी गठबंधन महायुति ने 5 नवंबर को मेनिफेस्टो जारी किया था. महायुति ने इसमें किसानों का कर्ज माफ करने की गारंटी दी थी. ऐसा तब है जब किसान कर्जमाफी के खिलाफ मुखर नजर आने वाली भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) इस गठबंधन में सबसे बड़ा दल है. अगले ही दिन विपक्षी महाविकास अघाड़ी (एमवीए) ने मुंबई के बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स में स्वाभिमान सभा का आयोजन किया. इसी कार्यक्रम में एमवीए ने चुनाव के लिए पांच गारंटी दी. इस आयोजन के दौरान जो सबसे चर्चित वाकया रहा, वह था राहुल गांधी की मौजूदगी में मंच से जयस्तुते का गान. जयस्तुते वीर सावरकर की रचना है जिनके खिलाफ राहुल गांधी मोर्चा खोले रखते हैं.
बीजेपी की मौजूदगी या यूं कहें कि अगुवाई वाले गठबंधन की ओर से किसान कर्जमाफी का वादा किया जाना और राहुल गांधी की मौजूदगी में वीर सावरकर की रचना का गान, ये दोनों ही विषय चर्चा का केंद्र बने हुए हैं. बात इसके पीछे के गणित को लेकर भी हो रही है. इसे एमवीए में एकनाथ शिंदे और अजित पवार की पार्टियों की मजबूती और एमवीए में शरद पवार और उद्धव ठाकरे के ड्राइविंग सीट पर होने का प्रतीक भी बताया जा रहा है. लेकिन क्या बात बस इतनी सी ही है? इन वाकयों के पीछे का गणित समझने के लिए महाराष्ट्र की जोनल पॉलिटिक्स को जानना भी जरूरी है.
महाराष्ट्र में हैं 6 जोन
महाराष्ट्र की जोनल पॉलिटिक्स की बात करें तो 288 विधानसभा सीटों वाला यह प्रदेश छह जोन में बंटा है. राजनीतिक लिहाज से पश्चिमी महाराष्ट्र 70 विधानसभा सीटों के साथ सबसे बड़ा प्रदेश है तो वहीं 35 सीटों के साथ उत्तर महाराष्ट्र सबसे छोटा. विदर्भ में 62, मराठवाड़ा में 46, ठाणे-कोंकण में 39 और मुंबई रीजन में 36 विधानसभा सीटें आती हैं. हर एक रीजन के अपने मुद्दे हैं, अपना मिजाज है और अपनी पार्टी है. कहीं कांग्रेस किंग रही है तो कहीं बीजेपी का दबदबा रहा है. कोई रीजन एनसीपी का गढ़ रहा है तो कोई शिवसेना के साथ रहा है. कौन सा रीजन किस पार्टी का कोर एरिया रहा है?
मराठवाड़ा रहा है कांग्रेस का गढ़
महाराष्ट्र का मराठवाड़ा रीजन कभी कांग्रेस का गढ़ रहा है. पूर्व मुख्यमंत्री शंकरराव चव्हाण से लेकर अशोक चव्हाण तक, 46 सीटों वाले इस रीजन में कांग्रेस के मजबूत स्तंभ रहे हैं लेकिन पिछले कुछ चुनावों से इस रीजन की तस्वीर बदली है. मराठा बाहुल्य इस इलाके में पिछले दो चुनावों की ही बात करें तो कांग्रेस का ग्राफ गिरा है. 2014 के महाराष्ट्र चुनाव में बीजेपी 15 सीटें जीतकर मराठवाड़ा की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी तो कांग्रेस नौ सीटें ही जीत सकी थी. शिवसेना (संयुक्त) को 11 और एनसीपी (संयुक्त) को आठ सीटों पर जीत मिली थी. 2019 में बीजेपी 14, शिवसेना 13 और एनसीपी आठ सीटें जीतने में सफल रहे लेकिन कांग्रेस एक सीट के नुकसान के साथ आठ सीटें ही जीत सकी.

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