
महाकुंभ: 45 दिन में 66 करोड़ स्नान... तीन राज्यों और लोकसभा चुनाव 2029 में दिखेगा असर?
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प्रयागराज में गंगा-यमुना-सरस्वती के मिलन वाले संगम का जल बंगाल की सियासत तक पहुंचने लगा है. तब इस सियासी दस्तक को ध्यान से समझने की जरूरत है कि क्या जिस महाकुंभ में 45 दिन में 66 करोड़ 30 लाख लोगों ने स्नान किया है, उस महाकुंभ का असर 2025 में बिहार, 2026 में पश्चिम बंगाल और 2027 में उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव समेत 2029 के लोकसभा चुनाव तक बड़ा असर दिखाने वाला है?
प्रयागराज का नाम तब इलाहाबाद था. बात साल 2013 की है. कुंभ में बड़े संत सम्मेलन से पहले विश्व हिंदू परिषद के तत्कालीन सबसे बड़े नेता अशोक सिंघल ने कहा था कि नरेंद्र मोदी को लेकर ऐसा फैसला कुंभ में होगा कि इतिहास बदल जाएगा. साल 2001 में सोनिया गांधी ने कुंभ स्नान किया. तीन साल बाद यूपीए की दस साल तक चलने वाली सरकार बनी. साल आया 2019. लोकसभा चुनाव से 15 दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रयाग के अर्धकुंभ में डुबकी लगाई. पांच सफाई कर्मचारियों के पैर तब पीएम ने धोए थे. इतिहास गवाह रहा है संगम किनारे कुंभ से निकली दस्तक भविष्य की चुनावी राजनीति में बड़ी हलचल लाती रही है. क्या वैसा ही खेला महाकुंभ से इस बार भी हो सकता है?
प्रयागराज में गंगा-यमुना-सरस्वती के मिलन वाले संगम का जल बंगाल की सियासत तक पहुंचने लगा है. जिस पश्चिम बंगाल के गंगा सागर में जाकर गंगा समाहित होती है, उसी बंगाल तक महाकुंभ वाला संगम जल कलश के साथ पहुंच रहा है. और तब इस सियासी दस्तक को ध्यान से समझने की जरूरत है कि क्या जिस महाकुंभ में 45 दिन में 66 करोड़ 30 लाख लोगों ने स्नान किया है, उस महाकुंभ का असर 2025 में बिहार, 2026 में पश्चिम बंगाल और 2027 में उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव समेत 2029 के लोकसभा चुनाव तक बड़ा असर दिखाने वाला है?
सवाल सुनकर आपको संभव है ये लगा हो कि चार साल बाद तक के चुनावों में महाकुंभ के असर की दस्तक किस आधार पर हम परखने लगे हैं? जवाब ये है कि जिस देश में 2024 के लोकसभा चुनाव में 80 दिन के भीतर कुल 64 करोड़ 40 लाख लोगों ने मतदान किया. वहीं 2025 में 45 दिन के भीतर 66 करोड़ 30 लाख लोगों ने आकर महाकुंभ में स्नान किया है. यानी मतदान से ज्यादा कुंभ स्नान. और इतिहास गवाह है कि कुंभ से निकली दस्तक से हलचल हर बार बड़ी निकली है.
2019 में किसी पीएम ने 42 साल बाद कुंभ में किया स्नान
2013 के प्रयाग कुंभ में 7 फरवरी धर्म संसद में नरेंद्र मोदी के नाम को लेकर संतों ने समर्थन किया था और 2014 में वह प्रधानमंत्री बने. 12 साल पहले नरेंद्र मोदी तब कुंभ स्नान करने तो नहीं पहुंच पाए थे. लेकिन 2019 के अर्धकुंभ में प्रधानमंत्री ने संगम स्नान तब किया था, जब लोकसभा चुनाव का ऐलान होने में 15 दिन बाकी थे. तब 42 साल बाद किसी प्रधानमंत्री ने संगम में स्नान किया था. कारण, नरेंद्र मोदी से पहले इंदिरा गांधी 25 जनवरी 1966 को पीएम बनने के अगले ही दिन कुंभ मे संगम पहुंची थीं. इंदिरा गांधी दूसरी बार कुंभ तब पहुंचीं जब 1977 में इमरजेंसी के दौरान लोकसभा भंग करने का ऐलान किया था. संतों का विरोध इंदिरा गांधी को देखना पड़ा था. तब 1977 में कुंभ के बाद देश में पहली गैर-कांग्रेसी सरकार बनी थी.
फरवरी 1989 में, कुंभ के दौरान ही संतों के सम्मेलन में ये ऐलान हुआ कि 9 महीने बाद राम मंदिर शिलान्यास किया जाएगा. 2001 में सोनिया गांधी प्रयाग कुंभ में संगम स्नान करने पहुंची थीं. जबकि 1999 के चुनाव में सोनिया गांधी के विदेशी मूल का मुद्दा उठा था. 2001 के कुंभ के दौरान ही अयोध्या में प्रस्तावित राम मंदिर का मॉडल वीएचपी ने सबके सामने रखा था. इतिहास ये याद दिलाने के लिए कि दशकों से कुंभ से निकला संदेश सियासत में लंबी दूरी तक पहुंचता है. तब क्या प्रयागराज में चले 45 दिन के महाकुंभ से भी राजनीति में खेला हो सकता है.

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