
भारत में ऑक्सीजन का उत्पादन अभी भी डिमांड से ज्यादा, फिर क्यों हो रही है किल्लत, यहां समझें
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भारत में ऑक्सीजन का रोजाना उत्पादन उसकी मांग से कहीं अधिक है. 12 अप्रैल के आंकड़ों के अनुसार देश में रोज़ाना की उत्पादन क्षमता 7287 मीट्रिक टन है और रोज़ की खपत 3842 मीट्रिक टन. वर्तमान में मांग 5000 मीट्रिक टन पहुंचने के बावजूद उत्पादन क्षमता से कम है.
दिल्ली में ऑक्सीजन सप्लायर के दुकान के बाहर खड़ी भीड़ बेचैन है. किसी को अपने अस्पताल के लिए, किसी को घर में मरीज़ के लिए ऑक्सीजन चाहिए. लेकिन राजधानी में सांसें भी उधार नहीं मिल पा रहीं. निजी अस्पतालों से कोरोना पेशेंट्स को भर्ती करने को तो कह दिया गया. लेकिन गंभीर रूप से पीड़ितों के लिए ऑक्सीजन जुटाने इन्हें दर दर भटकना पड़ रहा है. सरकार ने अस्पतालों में ऑक्सीजन सप्लाई बढ़ाने के लिए उद्योगों को ऑक्सीजन देने पर रोक लगा दी है. जिसके तहत अब केवल 9 जरूरी इंडस्ट्रीज को ही ऑक्सीजन सप्लाई जारी है. रिलायंस, टाटा स्टील, सेल, जिंदल स्टील ने कोविड के इलाज के लिए ऑक्सीजन की सप्लाई शुरू कर दी है. खाद बनाने वाली सहकारी समिति IFFCO ऑक्सीजन के प्लांट लगा रही है जहां से अस्पतालों को मुफ्त ऑक्सीजन की सप्लाई होगी. साथ ही जरूरतों को पूरा करने के लिए 50,000 मीट्रिक टन मेडिकल ऑक्सीजन के आयात करने का फैसला लिया गया है.
आज जब वक्त इतना कीमती हो गया है कि लोग हरेक चीज की दस मिनट में डिलीवरी चाहते हैं. वहीं दूसरी तरफ विडंबना ये है कि भारत का एक शहर ऐसा है जहां इंसान को कहीं जाने के लिए सड़कों पर ट्रैफिक में फंसना पड़ता है. यहां हर साल औसतन 168 घंटे लोग ट्रैफिक में फंसे रहते हैं. यानी पूरे एक हफ्ते का समय सिर्फ ट्रैफिक में चला जाता है.

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दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता में सुधार के कारण कमीशन ऑफ एयर क्वालिटी इंप्रवूमेंट (CAQM) ने GRAP-3 पाबंदियां हटा दी हैं. AQI में सुधार के चलते अब कंस्ट्रक्शन और आवाजाही पर लगी पाबंदियों में राहत मिली है. IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में AQI 'एवरेज' से 'खराब' श्रेणी में रह सकता है, जिसके कारण GRAP-3 के तहत गंभीर पाबंदियां लागू नहीं की जाएंगी.

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