
भारत में इस कारण तेजी से बढ़ रहा मोटापा, 50 करोड़ से ज्यादा लोग बन सकते हैं शिकार
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भारत में एक जमाने में मोटे लोगों को 'खाते पीते परिवार' का माना जाता था. यानी ऐसे लोगों के लिए कहा जाता था कि ये समृद्ध परिवार से हैं लेकिन आजकल के दौर में मोटापा समृद्धि नहीं बल्कि बीमारी की निशानी है और ये बीमारी तेजी से भारतीयों को अपनी चपेट में ले रही है.
भारत में मोटापा एक तेजी से बढ़ती हुई समस्या है. पिछले कुछ सालों में मोटापा महामारी की तरह फैला है. जीन्स या खानपान या फिर कुछ और.... आखिर क्या वजह है कि जो भारतीयों को मोटापे की तरफ धकेल रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, वर्ष 1990 में भारत की सिर्फ 12 पर्सेंट महिलाएं और 8 पर्सेंट पुरुष मोटापे का शिकार थे और इनमें भी 15 से 24 वर्ष के युवाओं की संख्या सिर्फ 73 लाख थी. लेकिन वर्ष 2021 में इस आयु वर्ग के 2 करोड़ 98 लाख युवा मोटापे का शिकार हो गए और आज 2025 में भारत के 10 करोड़ से ज्यादा लोग Overweight हैं और मोटापे ने उन्हें चारों तरफ से घेर लिया है.
समद्धि की निशानी माना जाता था मोटापा
भारत में एक जमाने में मोटापे को समृद्धि की निशानी माना जाता था और कहा जाता था कि ऐसे लोग 'खाते पीते परिवार' से होते हैं. हिंदी फिल्मों में भी यही दिखाया जाता था कि गरीब इंसान पतला दुबला होता था और गांव के 'सेठ' और जमींदार मोटे होते थे. लेकिन अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं. और अब जो गरीब लोग हैं, उनका वजन ज्यादा होता है और जो लोग आर्थिक रूप ये समृद्धि होते हैं, वो फिट होते हैं और उन्हें मोटापा नहीं होता और इसका सबसे बड़ा कारण है, हमारे देश का बदलता खानपान.
महंगा हो रहा है ताजा भोजन
आज हमारे देश में ताजा खाना महंगा है और पैकेट वाला Processed खाना सस्ता है. जैसे शाकाहारी थाली 120 रुपये की है जबकि बर्गर 50 रुपये का है और पिज्जा 70 रुपये का है. इसी तरह आज अगर कोई व्यक्ति बाजार से ताजे आलू खरीदकर उसकी सब्जी बनाकर खाता है तो उस सब्जी को बनाने का खर्च 25 से 30 रुपये होगा जबकि इसी आलू के चिप्स का एक पैकेट 10 रुपये में मिल जाता है और यही कारण है कि आज हमारे देश में लोग ताजा पके खाने से दूर हो रहे हैं और पैकेट वाला Processed खाना खा रहे हैं.
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