
भारत जोड़ो यात्रा: सड़कों पर राहुल, जनता से आमना-सामना... क्या होगा हासिल?
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राहुल गांधी ने 2019 लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष के पद से इस्तीफा दे दिया था. तब से राहुल गांधी कांग्रेस को मजबूत करने की कवायद में जुटे हैं. अब भारत जोड़ो यात्रा के जरिए राहुल जनता के बीच हैं और अपनी छवि सुधारने की कवायद में जुटे हैं. अब देखना है कि आने वाले चुनावों में इसका क्या असर होता है.
राहुल गांधी की छवि राजनीतिक विरासत के राजकुमार से 'पप्पू' तक बन गई. अपनी इस छवि के कारण वो लगातार राजनीति में संघर्ष करते दिखे. उन्हें 'पप्पू' साबित करने के लिए लगातार कोशिशें की गईं और कई तरह के तर्क दिए जाते रहे हैं. लेकिन इसके पीछे एक बड़ा कारण कांग्रेस की सबसे बड़ी विरोधी भारतीय जनता पार्टी द्वारा इसे साबित करने के लिए लगातार कुछ ना कुछ तर्क देना और गांधी परिवार और उनकी टीम द्वारा इसका काउंटर करने में विफल होना है.
एक पहलू ऐसा है जिससे राहुल को लगातार कठघरे में खड़ा किया जा सकता है. वो ये कि राजनीति को उन्होंने अपने प्रोफेशन के रूप में अपनी रुचि के अनुसार नहीं चुना है बल्कि शायद थोपा गया है. यही कारण है कि राजनीति में उनकी गंभीरता की कमी दिखती है. कई अहम मौकों पर जब एक विपक्षी पार्टी के प्रमुख नेता के रूप में उनकी मौजूदगी अहम थी, तब वो छुट्टियां मनाने विदेश चले गए. ऐसे में कांग्रेस लगातार कमजोर होती जा रही है और कई नेता पार्टी छोड़ते जा रहे हैं. और राहुल इन परिस्थितियों को काबू करने में संघर्ष करते दिख रहे हैं.
भारत जोड़ो यात्रा के जरिए ऐसा लग रहा है कि चीजें बदल रही हैं. 52 साल के जीवन में पहली बार ऐसा लग रहा है कि एक राजनेता को जहां होना चाहिए वहां राहुल गांधी हैं यानि जनता के बीच. एक राजनेता को सफल होने के लिए जनता को समझना जरूरी है और अब यह राहुल कर रहे हैं. उनके बारे में लगातार कहा जाता रहा है कि उन्हें देश और जनता एवं उनकी समस्याओं को समझना होगा. अब वो उस पर अमल करते नजर आ रहे हैं.
हम यह नहीं जानते कि भारत के कई हिस्सों को कवर करने वाली महीनों लंबी पदयात्रा उनके ऊपर थोपे गए मुकुट की तरह है या उन्होंने इसे स्वेच्छा से शुरू किया है. हम यह भी नहीं जानते कि सोशल मीडिया के जमाने में उन्हें अपनी छवि सुधारने के लिए पदयात्रा के दौरान फोटो सेशन के जरिए मौके देने की सलाह दी गई है और वो उस पर अमल कर रहे हैं.
भारत जोड़ो यात्रा एक अवसर
राहुल गांधी केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक और अब महाराष्ट्र की सड़कों पर चल रहे हैं और उन्हें अभी कई और राज्यों को कवर करना है. इस दौरान राहुल गांधी में कोई थकान नहीं दिख रही है. वह अभी तक एक भी विदेशी दौरे पर गायब नहीं हुए हैं. ऐसे में राहुल गांधी अपनी यात्रा को लेकर काफी प्रतिबद्ध दिख रहे हैं.

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