
भारत के हाथों करारी हार ने पाकिस्तान क्रिकेट की किस दुखती रग को छेड़ दिया है
BBC
खेल में हार-जीत होती रहती है लेकिन पाकिस्तान की टीम जिस तरह अब भारत से हारती जा रही है उसने इस सच्चाई को साफ़ कर दिया है कि दोनों टीमों के बीच अब एक बड़ा फ़र्क़ आ चुका है.
पाकिस्तान की क्रिकेट टीम जब भी किसी टूर्नामेंट में भारत से हारती है तो यह एक नया ज़ख्म होता है लेकिन असल में हर नई शिकस्त पुराने ज़ख्मों को फिर से ताज़ा कर देती है.
टी-20 इंटरनेशनल क्रिकेट में पाकिस्तान की टीम भारत से 13 मैच हार चुकी है. जहां तक टी-20 वर्ल्ड कप का संबंध है तो हार का यह सिलसिला 8 मैचों तक लंबा हो चुका है. इसके मुक़ाबले पाकिस्तान के खाते में सिर्फ़ एक जीत नज़र आती है.
कोलंबो के प्रेमदासा स्टेडियम में भारत के ख़िलाफ़ अपने तीसरे सबसे कम स्कोर पर आउट होकर 61 रनों की करारी हार से दो-चार होने वाली पाकिस्तान टीम की परफ़ॉरमेंस ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं.
खेल में हार-जीत होती रहती है लेकिन पाकिस्तान की टीम जिस तरह अब भारत से हारती जा रही है उसने इस सच्चाई को साफ़ कर दिया है कि दोनों टीमों के बीच अब एक बड़ा फ़र्क़ आ चुका है.
केवल यही नहीं कि भारत अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में पहले और पाकिस्तान छठे नंबर की टीम है, दोनों टीमों की मानसिक परिपक्वता और मज़बूती में ज़मीन-आसमान का फ़र्क़ नज़र आता है. मुश्किल हालात में हिम्मत बनाए रखने और हौसला खो देने का फ़र्क़ हमें कोलंबो के इस मैच में साफ़ तौर पर दिखा.
उस्ताद क़मर जलालावी की मशहूर ग़ज़ल 'कब मेरा नशीमन अहल-ए-चमन…', जिसे हबीब वली मोहम्मद ने गाया था, उसका एक मिसरा मुझे इस मौक़े से याद आ रहा है: "जब कश्ती डूबने लगती है तो बोझ उतारा करते हैं."













