
बांग्लादेश: पीएम मोदी की गर्मजोशी को तारिक़ रहमान हाथों-हाथ लेने से परहेज़ क्यों कर रहे हैं?
BBC
भारत बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री तारिक़ रहमान के स्वागत में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है लेकिन ऐसी गर्मजोशी सार्वजनिक रूप से दूसरी तरफ़ से नहीं दिख रही है. आख़िर इसके पीछे की वजह क्या है?
भारत की विदेश नीति में कुछ साल पहले तक बिना अवामी लीग के चुनाव और बीएनपी के सत्ता में आने को किसी बड़े झटके के रूप में देखा जाता था.
अब भारत तारिक़ रहमान और उनकी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के सत्ता में आने पर स्वागत करने में कोई कसर नहीं छोड़ता दिख रहा है.
बिना अवामी लीग के बांग्लादेश में चुनाव पर भी भारत ने 'आपत्ति' नहीं जताई.
साथ ही अवामी लीग का खुलकर समर्थन भी भारत नहीं कर रहा. तो क्या इसका ये संदेश जाता है कि बांग्लादेश में जुलाई 2024 में हुए सियासी विद्रोह के दौरान भारत ने जो रुख़ अपनाया था, वो रणनीतिक रूप से ठीक नहीं था?
बात केवल बीएनपी की ही नहीं है. भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी के अमीर शफ़ीक़ुर रहमान से भी मिल रहे हैं और इस मुलाक़ात की तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर पोस्ट की जा रही हैं.
जमात से मिलने की सार्वजनिक सूचना देना एक अहम टर्न है.
बांग्लादेश में 12 फ़रवरी को हुए आम चुनाव में तारिक़ रहमान के नेतृत्व वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) को जीत मिली तो भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 फ़रवरी को बधाई देने में बिल्कुल भी देरी नहीं की.













