
भारत के साथ अफगानिस्तान के आर्थिक और राजनीतिक रिश्ते बरकरार रखना चाहते हैं: तालिबानी नेता स्टेनकजई
AajTak
तालिबान की ओर से एक बार फिर बयान दिया गया है कि वह भारत के साथ अपने राजनीतिक और आर्थिक रिश्तों को बरकरार रखना चाहता है. तालिबान के सीनियर लीडर शेर मोहम्मद अब्बास स्टेनकजई ने ये बयान दिया है.
अफगानिस्तान (Afghanistan) की नई स्थिति को लेकर भारत सरकार (Indian Government) ने अभी अपनी रणनीति पूरी तरह से जाहिर नहीं की है. लेकिन तालिबान की ओर से एक बार फिर बयान दिया गया है कि वह भारत के साथ अपने राजनीतिक और आर्थिक रिश्तों को बरकरार रखना चाहता है. तालिबान के सीनियर लीडर शेर मोहम्मद अब्बास स्टेनकजई (Sher Mohammad Abbas Stanekzai) ने ये बयान दिया है. शेर मोहम्मद अब्बास स्टेनकजई के मुताबिक, अफगानिस्तान में तालिबान (Taliban) की सरकार बनाने के लिए कई लोगों से बात चल रही है, अलग-अलग तबकों के लोगों के संपर्क किया जा रहा है. भारत को लेकर शेर मोहम्मद अब्बास स्टेनकजई ने कहा कि हम भारत के साथ ट्रेड, आर्थिक और राजनीतिक रिश्ते बरकरार रखना चाहते हैं, हम इन रिश्तों को काफी महत्व देते हैं. भारत-अफगानिस्तान के बीच एयर कॉरिडोर को लेकर हुए सवाल को लेकर शेर मोहम्मद अब्बास स्टेनकजई ने ये बयान दिया. तालिबानी नेता ने कहा कि भारत इस क्षेत्र का एक अहम देश है, इसलिए वह उसके साथ संबंध बरकरार रखना चाहते हैं.
अमेरिका और ईरान में इस समय टकराव देखने को मिल रहा है. अमेरिका ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के संकेत दे रहा है. अमेरिका का विमानवाहक युद्धपोत अब्राहम लिंकन समुद्र के रास्ते ईरान के करीब पहुंच चुका है जिससे ईरान-अमेरिका के बीच युद्ध की आशंकाएं बढ़ गई हैं. हालांकि, अरब देश अमेरिका को ईरान पर हमला करने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं. लगातार धमकियों के बावजूद ईरान पर सीधे हमले से क्यों बच रहा अमेरिका? देखें श्वेतपत्र.

अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के संकेत दिए हैं. अमेरिका का विमानवाहक युद्धपोत अब्राहम लिंकन समुद्र के रास्ते ईरान के करीब पहुंच चुका है जिससे ईरान-अमेरिका के बीच युद्ध की आशंकाएं बढ़ गई हैं. वहीं अरब देश अमेरिका को ईरान पर हमला करने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं. दूसरी ओर, ईरान ने इजरायल के आठ प्रमुख शहरों पर हमले की योजना तैयार की है. इस बढ़ती तनाव की स्थिति से मध्य पूर्व में सुरक्षा खतरे और बढ़ सकते हैं.

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने अमेरिका और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर तीखा हमला करते हुए ट्रंप को ईरान में हुई मौतों, नुकसान और बदनामी के लिए जिम्मेदार ठहराया और उन्हें 'अपराधी' बताया. उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान में हालिया अशांति अमेरिका की साजिश है और ट्रंप ने खुद इसमें दखल देकर प्रदर्शनकारियों को उकसाया.

व्हाइट हाउस ने गाजा को फिर से बसाने और उस पर शासन के लिए बने 'बोर्ड ऑफ पीस' के सदस्यों की लिस्ट जारी की है. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप बोर्ड के अध्यक्ष होंगे. जबकि विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ, पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर सदस्य होंगे. देखें दुनिया आजतक.

ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों में अब तक हजारों लोगों की मौत हो चुकी है. अयातुल्ला अली खामेनेई की हुकूमत ने प्रदर्शनकारियों को कुचलने के लिए फांसी जैसे खौफनाक कदम उठाने का फैसला किया तो अमेरिका ने सीधे एक्शन की चेतावनी दे डाली. हालांकि बाद में ईरान और ट्रंप के ताजा बयानों ने दुनिया को थोड़ी राहत दी. मगर ईरान संकट अब सिर्फ एक देश का नहीं, बल्कि वैश्विक टकराव का संकेत बनता जा रहा है.








