
भारत की 'डेड इकॉनमी' के दस साल में राहुल गांधी दस गुना अमीर कैसे बने?
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राहुल गांधी ने एक मरी हुई अर्थव्यवस्था वाले देश में भी पिछले 10 वर्षों में अपनी कमाई 117 प्रतिशत बढ़ा ली. यानी दस गुना से ज्यादा. इतना ही नहीं इस मृत अर्थव्यवस्था पर इतना भरोसा दिखाया कि करोड़ों रुपये शेयर बाजार में लगाए और जबरदस्त मुनाफा कमाया.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के राहुल गांधी ताजा-ताजा मुरीद बने हैं. गुरुवार को ही अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक बयान में भारत और रूस की इकॉनमी को डेड इकॉनमी बताया था. जिस पर राहुल ने संसद परिसर में पत्रकारों से ट्रंप की हां में हां मिलाते हुए कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था पर अमेरिकी राष्ट्रपति की राय सही है. राहुल ने कहा कि हर कोई जानता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था मृत है, सिवाय प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री के. उन्होंने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए दावा किया कि नोटबंदी, दोषपूर्ण जीएसटी, असेंबल इन इंडिया की विफलता, MSME का विनाश, और किसानों पर अत्याचार ने अर्थव्यवस्था को बर्बाद किया है.
हालांकि राहुल गांधी का मोदी सरकार और यूपीए सरकार के कार्यकाल में किए गए इन्वेस्टमेंट और कमाई की तुलना उनके डेड इकॉनमी के बयान को खारिज करती है. यूपीए सरकार की तुलना में उन्हें मोदी सरकार में इन्वेस्टमेंट करने में ज्यादा भरोसा दिखाया है. राहुल को इस भरोसे का मोनेट्री फायदा भी हुआ है. राहुल ने मोदी सरकार के दौरान शेयर बाजार में निवेश से करोड़ों कमाएं हैं. राहुल गांधी की पिछले 10 वर्षों में कमाई भी 117 प्रतिशत गुना बढ़ गई है. आइये देखते हैं कि कैसे उनकी नजरों में एक मरी हुई अर्थव्यवस्था ने उन्हें मालामाल कर दिया.
मोदी सरकार बनने के बाद शेयर बाजार पर राहुल का भरोसा बढ़ा, और रिटर्न भी
राहुल गांधी के उनके लोकसभा चुनावों दिए गए हलफनामों (2004, 2014, 2019, 2024) के आधार पर पता चलता है कि उन्होंने शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड से अच्छी कमाई की है. ऐसे समझ लीजिये कि 2014 में राहुल गांधी के शेयरों की वैल्यू 83 लाख थी, जो 2024 में बढ़कर 8.3 करोड़ रुपए हो गई. यानी दस साल में दस गुना रिटर्न. यूपीए सरकार (2004-2014) और मोदी सरकार (2014-2024) के दौरान उनकी कमाई की भी तुलना की जा सकती है.राहुल गांधी ने मोदी सरकार में शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड से 6.6 से 8.3 करोड़ रुपये कमाए जबकि यूपीए काल ले 60 से 80 लाख रुपये ही कमा सके थे. ऐसा इसलिए संभव हो सका क्योंकि राहुल गांधी ने मोदी सरकार में रिस्क लेकर जोखिमपूर्ण निवेश किया. यानि कि उन्हें मोदी सरकार में बाजार पर अधिक भरोसा किया.
यूपीए काल में राहुल का निवेश मुख्य रूप से डेट-आधारित म्यूचुअल फंड (2014 में 81.28 लाख रुपये) और PPF में था, बिना प्रत्यक्ष शेयर बाजार निवेश के. यानि कि यूपीए सरकार में उन्हें डर था इकॉनमी गिर सकती है इसलिए उन्होंने शेयर बाजार में पैसा नहीं लगाया. म्यूजुअल फंड और पीपीएफ में अनुमानित रिटर्न 6-8% CAGR पर 10 वर्षों में 60-80 लाख रुपये रहा.
मोदी सरकार के दौरान उनका भरोसा देश की इकॉनमी में बढ़ा. शेयर बाजार में उनका बढ़ता इंट्रेस्ट इस बात को साबित करता है. राहुल ने शेयर बाजार में 2019 में 5.19 करोड़, 2024 में 4.33 करोड़ रुपये निवेश किए. म्यूचुअल फंड में बढ़ोतरी की ( 2024 में 3.81 करोड़ रुपये). BSE सेंसेक्स की 13% CAGR वृद्धि के साथ, उनके शेयर और फंड ने 12-15% CAGR रिटर्न दिया. जिसके चलते 2014-2024 में 6.6-8.3 करोड़ रुपये की कमाई हुई.

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